Biography of Maharana Pratap

Biography of Maharana

Pratap in Hindi  

                 महाराणा प्रताप

Image by:- www.aajtak.in

जन्म :- 9 म‌ई 1540 उदयपुर (राजस्थान)

पिता :- उदय सिंह द्वितीय

माता :- जैवन्ती बाई

पत्नि :- अजबदे बाई

मृत्यु :- 29 जनवरी 1597 छावंद (राजस्थान)

महाराणा प्रताप का जीवन परिचय  :- 

महाराणा प्रताप का जन्म कब हुआ :- महाराणा प्रताप का जन्म 9 म‌ई 1540 को राजस्थान के उदयपुर के कुम्भलगड़ किले में हुआ इनके पिता का नाम उदय सिंह द्वितीय था जो मेबाड़ के महाराज थे इनकी माता का नाम जैवन्ती बाई थी। महाराणा प्रताप के 24 भाई थे साथ ही उनकी कई बहनें भी थी महाराणा प्रताप ने सही शिक्षा प्राप्त कीसाथ ही उन्होंने युद्ध और शास्त्रकला में भी महारत हासिल की महाराणा प्रताप राजा उदय सिंह दतिया के जेष्ठ पुत्र थे इसकी वजह से राजगद्दी के हकदार महाराणा प्रताप थे लेकिन राजा उदय सिंह द्वितीय को महाराणा प्रताप प्रिय नहीं थे जिसके कारण वे महाराणा प्रताप को राजगद्दी पर बैठाना नहीं चाहते थे उन्होंने महाराणा प्रताप के छोटे भाई जगमाल सिंह को राजगद्दी पर बैठाया लेकिन साम्राज्य के सभी मंत्री गण उदय सिंह द्वितीय के इस फैसले से खुश नहीं थे तथा उदय सिंह द्वितीय की मृत्यु के बाद जगमल को राजगद्दी से हटा दिया गया और उनके स्थान पर महाराणा प्रताप को मेवाड़ का शासक बनाया गया महाराणा प्रताप 1572 में मेवाड़ के 54वें शासक बने उनका मुख्य लक्ष्य था 'मुगल शासन से आजादी' महाराणा प्रताप को राजपूतों का सबसे महान शासक माना जाता है इतिहास भी इसकी गवाह है महाराणा प्रताप ने अपनी वीरता से चारों दिशाओं में अपना परचम लहराया।

महाराणा प्रताप का इतिहास :- 

महाराणा प्रताप एक कुशल सम्राट और साहसी योद्धा थे उन्होंने मुगलों के सामने नतमस्तक होकर शासन करने से मना कर दिया वे चाहते थे कि भारत को मुगल साम्राज्य से आजादी मिले। लेकिन महाराणा प्रताप को छोड़कर सभी राजपूत सम्राट मुगल शासक अकबर के मित्र बन गये लेकिन महाराणा प्रताप ने कभी भी हार नहीं मानी मुगल सम्राट अकबर महाराणा प्रताप से समझौता करना चाहते थे लेकिन वो कहते हैं न कि सच्चे राजपूत किसी के सामने सर नहीं झुकाते महाराणा प्रताप ने अकबर से समझौता करने से मना कर दिया जिसके परिणामस्वरूप 1576 को हल्दीघाटी का भयंकर युद्ध हुआ। 18 जून 1576 को मुगल सेनाओं ने हल्दीघाटी के गोमुंदा जो वर्तमान में राजस्थान में है में महाराणा प्रताप की सेना पर हमला कर दिया मुगलों की सेना बहुत ज्यादा तादाद में थी जबकि महाराणा प्रताप की सेना बहुत कम थी इसलिए उन्हें मैदान छोड़कर भागना पड़ा इस समय उनके घोड़े 'चेतक' ने असाधारण वीरता दिखाते हुए महाराणा प्रताप की जान बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी। 

हल्दीघाटी का युद्ध मुगलों के खिलाफ छापामार युद्ध था जो इतिहास में गीतो, चित्रों और लूटवार्ता द्वारा अमर हो गई यह भी माना जाता है कि महाराणा प्रताप शारीरिक तौर पर बहुत ही ज्यादा ताकतवर थे क्योंकि उनके कवच का वजन 72 किलोग्राम का था जबकि उनके भाला का वजन 81 किलोग्राम था। कहा जाता है कि महाराणा प्रताप 203 किलो वजन लेकर युद्ध करते थे महाराणा प्रताप इतने शक्तिशाली थे कि वे अपने एक ही बार से किसी भी इंसान के दो टुकड़े कर सकते थे।

महाराणा प्रताप की पत्नी एवं उनके संतान :- 

महाराणा प्रताप की शादी 1557 ई. में विजोलिया के सावंत रामराग पंवार की पुत्री अजब्दे पंवार से हुई उस समय महाराणा प्रताप की उम्र 17 वर्ष एवं अजब्दे पंवार की उम्र 15 वर्ष थी। महारानी अजब्दे महाराणा प्रताप की प्रथम पत्नी थी महारानी अजब्दे के अलावा महाराणा प्रताप की 10 और पत्नियां थी महाराणा प्रताप के 11 पत्नियां 17 पुत्र तथा 5 पुत्रियां थी जबकि अधिकतर पुरानो एवं लेखों में महाराणा प्रताप के केवल एक संतान अमर सिंह प्रथम का ही उल्लेख किया गया है। महाराणा प्रताप की 11 पत्नियां इस प्रकार है- अजब्दे पंवार, सोलंकीनीपुर बाई, चंपाबाई झाला,जसोबाई चौहान, फूलकंवर राठौड़, शाहमति बाई हाडा, आलमदे बाई चौहान,अमरा बाई राठौड़,लखा बाई, रत्नावती बाई पंवार और आशाबाई खिंचड़।

महाराणा प्रताप के संतान :- 

अमर सिंह प्रथम एवं भगवान दास अजब्दे पंवार के पुत्र थे। अमर सिंह प्रथम महाराणा प्रताप के पुुत्र-पुत्रियों में सबसे ज्येष्ठ थे। साशा बाई और गोपाल सिंह महारानी सोलंकीनी के संतान थे। कल्ला सिंह, रनवाल दास एवं दुर्जन सिंह महारानी चंपा बाई की संतान थी जबकि कल्याण दास जसोबाई चौहान की चंदा सिंह एवं शिखा सिंह महारानी फूल कंवर की पूरा सिंह महारानी शाहमति बाई की जसवंत सिंह महारानी आलमदे बाई की नत्था सिंह महारानी अमरा बाई की, रायभाना सिंह लखाबाई की, माल सिंह, गज सिंह और क्लिंगू सिंह महारानी रत्नावती की तथा हत्थी सिंह और राम सिंह महारानी आशाबाई खिंचड़ की संतान थी।

क्यो हुए महाराणा प्रताप इतने प्रसिद्ध :- 

महाराणा प्रताप की प्रसिद्धि का सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि वह एक महान सम्राट, कुशल शासक और साहसी योद्धा थे महाराणा प्रताप मुगलों के पैरों तले शासन नहीं करना चाहते थे महान सम्राट अकबर ने उन्हें कई बार समझौते के लिए कहा लेकिन उन्होंने समझौता करने से मना कर दिया वे चाहते थे कि भारत को मुगल शासन से आजादी मिले वे अंत तक मुगलों के साथ लड़ते रहे लेकिन उन्होंने कभी भी मुगलों के सामने घुटने नहीं टेके। उनकी प्रसिद्धि का एक और कारण है 'हल्दीघाटी का युद्ध' हल्दीघाटी के युद्ध में भले ही उन्होंने विजय नही प्राप्त किया लेकिन उन्होंने अपने कुछ सेनिको के साथ ही अकबर की विशाल सेना का सामना किया महाराणा प्रताप इतने शक्तिशाली राजपूत थे कि वे अकेले ही 100 दुश्मनों को मारने की शक्ति रखते थे।

महाराणा प्रताप को किसने मारा :- 

महाराणा प्रताप एक निडर शासक और साहसी एवं बलवान योद्धा थे जिसके कारण कोई भी उनसे शत्रुता नही करता था मुग़ल शासक अकबर ने उन्हें भले ही पराजित किया था लेकिन वे महाराणा प्रताप को मार न सके। उनकी मृत्यु के बारे में कहा जाता शिकार करने के दौरान एक घटना में उनकी मृत्यु हुई। 

महराणा‌ प्रताप की मृत्यु कैसे हुई:- 

29 जनवरी सन् 1597 को राजस्थान के छावंद में शिकार करने के दौरान एक घटना में महाराणा प्रताप की मृत्यु हो गई।

महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद उनकी राजगद्दी का क्या हुआ :-

महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद उनकी राजगद्दी उनके पुत्र अमर सिंह प्रथम ने संभाली लेकिन अमर सिंह प्रथम महाराणा प्रताप के समान ताकतवर और साहसी नहीं थे अमर सिंह प्रथम महारानी अजब्दे के पुत्र थे उन्होंने सन् 1615 में मुगल सम्राट जहांगीर के सामने हथियार डाल दिए इसके साथ ही मेवाड़ में राजपूतों का शासन समाप्त हो गया।

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