National Park of Madhya Pradesh in Hindi 2021 । मध्यप्रदेश के सभी राष्ट्रीय उद्यान

मध्यप्रदेश के सभी 12 राष्ट्रीय उद्यानों के बारे में संपूर्ण जानकारी ।

All information about 12 National Park of Madhya Pradesh in Hindi 


1. कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान ( Kanha kisli National Park )


कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :- 

कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और बाघ संरक्षित क्षेत्र है कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1 जून 1955 को किया गया था।
940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश राज्य का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है
वर्तमान समय में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश राज्य के 2 जिलों मंडला और बालाघाट के दो प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों, हॉलन और बंजार में 250 वर्ग किलोमीटर और 300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रों में विभाजित है। यह राष्ट्रीय उद्यान क‌ई प्रजातियों के पशु- पक्षियों  का घर है । रूडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध किताब और धारावाहिक जंगल बुक की भी प्रेरणा इसी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से ली गई थी । 

कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :-

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का संपूर्ण क्षेत्र मूल रूप से गोंडवानों की भूमि एक हिस्सा था, जो मध्य भारत की दो मुख्य जनजातियों गोंडों और बैगाओं द्वारा बसाया गया था। सन् 1862 में इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र को वन प्रबंधन नियमों द्वारा बाधित कर दिया गया था, इसके बाद 1879 में इस क्षेत्र के 1949 वर्ग किमी के क्षेत्र को एक आरक्षित वन घोषित कर दिया गया।

ब्रिटिश शासन के दौरान सन् 1933 में ब्रिटिश सरकार ने इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया इसके बाद 1 जून 1955 को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय उद्यान के रूप में मान्यता दी गई इसके बाद 1973 में बाघ परियोजना के तहत इस राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य नामित किया गया तथा 1974 में इसे बाघ अभयारण्य घोषित किया गया।

भारत सरकार के पर्यटन विभाग ने वर्ष 1991 और 2001 में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को भारत के सबसे अनुकूल पर्यटन राष्ट्रीय उद्यान के रूप में सम्मानित किया।


कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :- 

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान कई लुप्तप्राय स्तनधारियों, सरीसृप और पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां पायी जाती हैं जिसकी वजह से यह राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है।

इस राष्ट्रीय उद्यान में लुप्तप्राय रॉयल बंगाल टाइगर सहित बाघों की क‌ई प्रजातियां पाई जाती है इस राष्ट्रीय उद्यान बड़े स्तनधारियों की 22 प्रजातियां पाई जाती है जिसमें से तेंदुआ, जंगली बिल्ली, जंगली कुत्ते और गीदड़ों की सबसे अधिक संख्या पाई जाती है। इस अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में सामान्य रूप से चित्तीदार बाघ, चीतल, सांभर, बारहसिंगा, चौसिंघा, गौर, लंगूर, भौंकने वाले हिरण, जंगली सुअर, आलसी भालू, लकड़बग्घा, काला हिरन, रूड मोंगोज, बैजर, जंगली कुत्ता, भारतीय लोमड़ी पाए जाते हैं। इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले सरीसृपों में भारतीय कोबरा, अजगर, भारतीय क्रेट, रसेल्स वाइपर और चूहा साँप शामिल हैं।

कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :- 

मध्यप्रदेश राज्य के बालाघाट में स्थित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान अपनी प्रकृतिक जीवंतता एवं पाई जाने वाली वनस्पति के लिए प्रसिद्ध है। इस राष्ट्रीय उद्यान में फूलों की लगभग 200 प्रजातियां और पेड़ों की 70 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं इस क्षेत्र के जंगलो में घास के मैदान, साल वृक्ष के जंगल और अन्य वन पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में लेंडिया, धवा, बीजा, आंवला, सागौन, तेंदू, पलास, हर्रा, महुआ और बांस के पेड़ पाए जाते हैं इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में कई औषधीय वनस्पतियां पाई जाती है।

कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षी :- 

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के लुप्तप्राय एवं सुंदर पक्षियों की प्रजातियों पाई जाती है जो इस उद्यान में आने वाले पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करती है इस राष्ट्रीय उद्यान में लगभग 300 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं पक्षियों की इन प्रजातियों में स्थानीय पक्षियों के अलावा सर्दियों में आने प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। 

इस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली प्रमुख पक्षियों में सारस, चैती, पिंटेल, बगुला, पछतावा, मोर, जंगल फाउल, हूप, ड्रगोस,  बटेर, रिंग डूव्स शामिल हैं। पैराकीट पक्षी, ग्रीन कबूतर, पहाड़ी कबूतर, कोयल, पेनहास, मधुमक्खी, कठफोड़वा, फ़िंच, किंगफ़िशर, ओरीओल्स, उल्लू, और फ्लाईकैचर छोटी बत्तख, मोर-मोरनी, मुर्गा-मुर्गी, तीतर, पपीहा, उल्लू, पीलक, धब्बेदार पेराकीट्स आदि शामिल हैं।

कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान की प्रसिद्धि के कारण :- कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान, एशिया के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय उद्यान में से एक है इस राष्ट्रीय उद्यान में 300 से अधिक वन्यजीवो एवं पक्षियों की प्रजातियां जिसमें से 22 बड़े स्तनधारियों की प्रजातियां पाई जाती है रूडयार्ड किपलिंग की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक - द जंगल बुक इसी राष्ट्रीय उद्यान पर आधारित है जिसके कारण यह राष्ट्रीय उद्यान पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है।


2. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान ( Satpura National Park )

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :-

भारत के मध्यप्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले में स्थित
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान भारत का एक प्राचीन राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य है जिसे वनस्पतियों और जीवों के लिए संरक्षण सन् 1981 में स्थापित किया गया था वर्तमान समय में यह राष्ट्रीय उद्यान 524 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, इसके निकट स्थित सतपुड़ा पहाड़ी और महादेव पहाड़ियों से मिला है।
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान भारत के एक खूबसूरत राष्ट्रीय उद्यान के साथ-साथ एक प्रमुख बाघ अभयारण्य भी है।
वर्ष 2010 में इस राष्ट्रीय उद्यान को टीओएफटी वन्यजीव पर्यटन पुरस्कार प्रदान किया गया था।  

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान भारत के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बहुत ही महत्त्वपूर्ण है सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान का वन क्षेत्र कई विभिन्न पौधों और जानवरों के अलावा कई लुप्तप्राय और संकटग्रस्त प्रजातियों के जीवों का निवास स्थान है। 

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :-

वर्तमान में जिस स्थान पर सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान है इस स्थान की खोज ब्रिटिश शासन के समय सन् 1862 में बंगाल लांसर्स के कैप्टन ' जेम्स फोर्सिथ ' ने किया था इसके बाद में जब अंग्रेज अधिकारियों को इस क्षेत्र के हरे - भरे जंगलों के पारिस्थितिक और वाणिज्यिक मूल्य का एहसास हुआ तो उन्होंने इस क्षेत्र को एक आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया । भारत की स्वतंत्रता के बाद  मध्यप्रदेश राज्य सरकार ने इस संरक्षित क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया।
 इसके बाद भारत सरकार द्वारा सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान को बोली वन्यजीव अभयारण्य और पंचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य के साथ मिलाकर इसे एक बाघ अभयारण्य ( Tiger Reserve ) के रूप में घोषित किया गया ।

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :-

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान वन्यप्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है यह राष्ट्रीय उद्यान कई प्रकार के लुप्तप्राय वन्यजीवों का निवास स्थल है
इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में बाघ , स्लोथ भालू , भारतीय बाइसन , जंगली कुत्ता , तेंदुए , जंगली सूअर , ब्लैक बक , स्मूथ ऑटट , चार सींग वाले मृग , सांभर , चीतल, नीलगाय, उड़न गिलहरी, पैंगोलिन आदि शामिल हैं इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान विशालकाय भारतीय गिलहरी भी पाई जाती है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले जानवरों में तेंदुए , गौट , कुत्ते और स्लॉथ भालू की संख्या सबसे ज्यादा है इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से धनेश और मोर इस उद्यान के प्रमुख पक्षी है।

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :- 

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है जिसके कारण यह राष्ट्रीय उद्यान भारत के पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग है क्योंकि इस राष्ट्रीय उद्यान वनों की कई लुप्तप्राय और दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती है इस राष्ट्रीय उद्यान में 1300 से अधिक पौधों और फूलों की प्रजातियां पाई जाती है । इस राष्ट्रीय उद्यान सागौन , साल , तेंदू बांस , महुआ, और बेर के वृक्ष पाए जाते हैं इसके अलावा इस उद्यान में  कई प्रजातियों के घास और झाड़ियों के अतिरिक्त क‌ई प्रकार के औषधीय पौधे भी पाए जाते हैं।


3. माधव राष्ट्रीय उद्यान ( Madhav National Park )

माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :- 

माधव राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्यप्रदेश राज्य के शिवपुरी जिले में स्थित एक प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान हैं मध्य प्रदेश के सबसे पुराने राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन् 1958 में की गई थी यह राष्ट्रीय उद्यान 354 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ हैं । यह उद्यान मूल रूप से ग्वालियर के महाराजा के लिए शाही शिकार अभयारण्य था ।

माधव राष्ट्रीय उद्यान अपने  प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता हैं  यहाँ पाए जाने वाले वन्यजीव , वनस्पति और हरे - भरे वातावरण को देखने के लिए माधव राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष भर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है  इस राष्ट्रीय उद्यान की झीलें , झरने , घने जंगल और महल पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
माधव राष्ट्रीय उद्यान के वन्यजीवों को 1972 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत और भी अधिक सुरक्षित किया गया यह उद्यान पर्यटकों के लिए वर्ष भर खुला रहता है । इस राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार की पहाड़ियाँ , सूखे और पतझड़ी वन और घास के बड़े मैदानी क्षेत्र पाये जाते हैं।

माधव राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :- 

माधव राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास बहुत पुराना है इस राष्ट्रीय उद्यान का संबंध मुगल साम्राज्य और मराठा साम्राज्य से है मुगल काल के दौरान इस राष्ट्रीय उद्यान का संपूर्ण क्षेत्र मुगल सल्तनत के अधीन था मुगलों के शासनकाल के दौरान इस राष्ट्रीय उद्यान का घना जंगल मुगल सम्राटों के शिकारगाह के रूप में जाना जाता था इतिहासकारों के अनुसार अपनी सेन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए सम्राट अकबर द्वारा हाथियों के बड़े झुंड इस क्षेत्र के जंगलो से पकड़े गए थे उस समय यह क्षेत्र शाही शूटिंग रिजर्व के रूप में जाना जाता था इसलिए मुगलों द्वारा इस क्षेत्र को संरक्षित करके रखा गया था । 

ब्रिटिश शासन के दौरान सन् 1916 में शिकार के दौरान लॉर्ड हार्डिंग ने यहां एक ही दिन में गोली मारकर आठ बाघो की हत्या दी थी बाघों की हत्या के कारण सन् 1970 के दशक तक इस राष्ट्रीय उद्यान के जंगलो में बाघों की संख्या समाप्त हो गई लेकिन भारत सरकार द्वारा अपनाये गये बाघ संरक्षण अधिनियम के तहत बाघों का संरक्षण किया जाने लगा और वर्तमान समय में इस स्थान पर पुनः बाघ देखे जा सकते हैं।

माधव राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :-

माधव राष्ट्रीय उद्यान क‌ई प्रकार के लुप्तप्राय वन्यजीवों के लिए आकर्षण का केंद्र है यहां कई प्रकार के लुप्तप्राय और सुंदर वन्यजीव निवास करते हैं यह सभी वन्यजीव यहां आने वाले पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में मुख्य रूप से सांभर , लकड़बग्घा , बाघ , नीलगाय , सुस्त भालू , मगरमच्छ , चिंकारा , हिरण , तेंदुआ , भेड़िया , सियार , लोमड़ी , जंगली सुअर , जंगली बिल्ली , हाथी , ब्लैक बक , घड़ियाल और लंगूर शामिल हैं । इसके अलावा माधव राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की भी क‌ई प्रजातियां पाई जाती है जिनमें सफेद स्तन वाले किंगफिशर , प्रवासी गीज , बड़े चितकबरे , पोचार्ड , बैंगनी सनबर्ड , सफेद इबिल और लैगर फाल्कन शामिल हैं।

माधव राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :-

माधव राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली वनस्पतियों के कारण भी यह राष्ट्रीय उद्यान काफी समृद्ध और प्रसिद्ध है इस उद्यान की पहाडिया सूखे और हरे - भरे मिश्रित जगल घास के मैदानी क्षेत्र पाते जाते हैं । इस राष्ट्रीय उद्यान की प्रमुख वनस्पतियों में धवड़ा , खैर , करधई , सलाई आदि शामिल हैं धान में अधिकांश रूप से पलाश के वृक्ष देखने को मिलते हैं।


4. पन्ना राष्ट्रीय उद्यान ( Panna National Park )

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :- 

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिले में स्थित भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य है है पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भारत का 22 वां बाघ अभयारण्य और मध्यप्रदेश का 5 वां वन्यजीव अभयारण्य है। यह राष्ट्रीय उद्यान उत्तर में पन्ना और छतरपुर जिलों में फैला हुआ है । 
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1981 में किया गया था तथा इसका क्षेत्रफल 542.67 वर्ग किलोमीटर है ।
वर्ष 1994 में भारत सरकार द्वारा बाघ परियोजना के तहत इस राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य ( Tiger Reserve )  घोषित किया गया था, वर्तमान समय में यह बाघ अभयारण्य 56 बाघों का निवास स्थान है 

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवों के कारण यह राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है यह राष्ट्रीय उद्यान जंगली बिल्ली , बाघ , मृग के अलावा अनेक वन्यजीवो की प्रजातियों एवं पक्षियों की 200 से अधिक प्रजातियों का निवास स्थान है। 
इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान से होकर बहने वाली केन नदी इसके आकर्षण को क‌ई गुना बढ़ा देती है
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवो के साथ - साथ नवपाषाण युग के कई ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है  
 
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को तीन क्षेत्रों ताडोबा उत्तर क्षेत्र , मोरहुली क्षेत्र और कोलसा दक्षिण रेंज में विभाजित किया गया है इसके अलावा ताडोबा नदी , ताडोबा झील और कोलासा झील इस राष्ट्रीय उद्यान के तीन प्रमुख जल स्रोत है।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :- 

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1981 में भारत सरकार द्वारा की गई थी जबकि वर्ष 1994 में इसे भारत के 22 वें बाघ अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था भारत के पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2007 में पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को भारत के सर्वश्रेष्ठ रखरखाव वाले राष्ट्रीय उद्यान के रूप में उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया गया था तथा बाघ संरक्षण के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए 25 अगस्त 2011 यूनेस्को द्वारा पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में घोषित  किया गया। 

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव:-

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भारत की विभिन्न लुप्तप्राय और दुर्लभ वन्यजीवो की प्रजातियों के संरक्षण और निवास के लिए जाना जाता है । पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में शाही बाघ , तेंदुआ , जगली कुत्ता , भेड़िया , सांभर , चीतल , चौसिंगा हिरण , जंगली बिल्ली , घड़ियाल , मगरमच्छ , चिंकारा , भालू और नीलगाय सहित वन्यजीवो की क‌ई प्रजातियाँ पाई जाती है वन्यजीवों के अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की लगभग 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है जिसमें सफेद गर्दन वाले सारस , हंस , हॉर्नबिल , गिद्ध और मोर शामिल हैं इस राष्ट्रीय उद्यान में गिद्धों की छह प्रजातियाँ पाई जाती हैं । इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में अजगर , किंग कोबरा  सहित विभिन्न प्रकार के सांपों की प्रजातियां पाई जाती है। 

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :-

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की जलवायु उष्णकटिबंधीय है इसीलिए यहाँ शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते है इस राष्ट्रीय उद्यान की प्रमुख वनस्पतियों में सागौन , बांस , कढाई  और बोसवेलिया शामिल है इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्र में महुआ , सजल बेल और सलाई के वृक्ष पाये जाते हैं इसके साथ ही इस उद्यान में कई सुंदर फूलों की प्रजातियाँ भी देखने को मिलती है।


5. बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान ( Bandhavgarh National Park )

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :-

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित मध्यप्रदेश राज्य का एक प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है । इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1968 में की गई थी । बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के खजुराहो से लगभग 237 किलोमीटर और जबलपुर शहर से लगभग 195 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है 

यह मध्यप्रदेश राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है जो 32 पहाड़ियों से घिरा हुआ है इसका क्षेत्रफल 437 वर्ग किमी है । मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान बाघो के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले बंगाल टाइगर जनसंख्या घनत्व के मामले में दुनिया में प्रथम स्थान पर है इसके अलावा यहां बड़ी संख्या में चीता और हिरण भी पाये जाते हैं इस राष्ट्रीय उद्यान के बीचोंबीच बांधवगढ़ पहाड़ी है जो इस राष्ट्रीय उद्यान को वस्तुतः चार भागों में विभाजित करते हैं इस राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्र में बांस के पेड़ बहुतायत मात्रा में पाये जाते हैं चरणगंगा नदी इस राष्ट्रीय उद्यान का प्रमुख जल स्रोत है जो इस राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है ।

इस राष्ट्रीय उद्यान का संपूर्ण वन क्षेत्र क‌ई प्रकार के वनस्पतियों और जन्तुओं से भरा हुआ है । इस राष्ट्रीय उद्यान में पशुओं की 22 प्रजातियां और पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियाँ पाई जाती हैं ।

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :-

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास कई सौ साल पुराना माना जाता है । इस राष्ट्रीय उद्यान को संपूर्ण क्षेत्र बर्षों पहले रीवा के महाराजा का शिकार गढ़ था लेकिन वर्ष 1968 में इसे एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था इसकी स्थापना के समय इस राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल 105 वर्ग किलोमीटर था लेकिन बाद में इस राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र को बढ़ाया गया वर्तमान समय में इस राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल 437 वर्ग किलोमीटर है। वर्ष 1993 में इस राष्ट्रीय उद्यान को एक बाघ अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया ।

इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम इसके निकट स्थित विंध्याचल पर्वतमाला की चोटी पर स्थित बांधवगढ़ किले के नाम पर रखा गया है और वर्तमान समय में बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के साथ-साथ भारत के महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :- 

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान कई लुप्तप्राय वन्यजीवो की प्रजातियों का घर है यहां पाए जाने वाले वन्यजीवो में बाघ , एशियाई लोमड़ी , सुस्त भालू , चीतल , सांभर , भौंकने वाले हिरण , चौसिंगा , लंगूर , जंगली चूहा , जंगली बिल्ली , तेंदुआ , हिरण , बंदर , जगली सूअर , नीलगाय , भारतीय पैंगोलिन , चिंकारा और गौर शामिल हैं इस राष्ट्रीय उद्यान में चमगादड़ की कई प्रजातियां पाई जाती है इसके अलावा यह राष्ट्रीय उद्यान कई प्रकार के पक्षियों का भी निवास स्थल है यहां पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियां पायी जाती हैं जिसमें तोता , मोर , बगुला , कौआ , हॉर्नबिल , बटेर , उल्लू , कबूतर , बाज , ब्लैक वल्चर शामिल हैं इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में अजगर , कछुआ , किंग कोबरा जैसे क‌ई जहरीले और खतरनाक सरीसृपों की प्रजातियाँ पा‌ई जाती है।

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :-

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली वनस्पति इसकी शानदार समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का वर्णन करती है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली वनस्पतिया आमतौर पर सूखे और पर्णपाती प्रकार की होती हैं , जिसमें से इस राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्र में ज्यादातर खाटे और बांस के पेड़ जंगल पाये जाते हैं।


6. वन विहार राष्ट्रीय उद्यान ( Van vihar National Park )

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :-

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल के बीचों-बीच स्थित मध्यप्रदेश राज्य का एक प्रमुख और अनोखा राष्ट्रीय उद्यान है।

यह वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के साथ-साथ एक मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख चिड़ियाघर तथा जंगली जानवरों का एक बचाव केन्द्र भी है यह मध्यप्रदेश राज्य का सबसे बड़ा चिड़ियाघर है यह राष्ट्रीय उद्यान 4.48 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।

लगभग 5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान के एक तरफ पहाड़ और हराभरा मैदानी क्षेत्र है जो जंगलों तथा हरियाली से आच्छादित है वहीं दूसरी ओर भोपाल का मशहूर बड़ा तालाब स्थित है।

यह राष्ट्रीय उद्यान अधिकतर उन जानवरों का निवास स्थान हैं जो लावारिस, कमजोर, रोगी, घायल अथवा बूढ़े हो गये है जंगलों से भटक-कर ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में गये जानवरों को पकड़कर यहां लाया जाता है जबकि कुछ जानवर दूसरे वन्यजीव अभयारण्यों से भी यहाँ लाए गये हैं जबकि कुछ जानवरों को सर्कसों से छुड़ाकर यहाँ रखा गया हैं इस राष्ट्रीय उद्यान के बीचोंबीच एक स्नेक पार्क भी है जहां विभिन्न प्रकार के साँप देखने को मिलते हैं।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान की शानदार खासियतों एवं यहां कि पारिस्थितिकी तंत्र की वजह से इसे 18 जनवरी 1983 को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया जो किसी उपलब्धि से कम नहीं है वर्तमान समय में यह राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है यहां यहां वर्ष भर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :-

वर्तमान समय में जिस स्थान पर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान है यह स्थान कभी अवैध पत्थरो की खदानों से घिरा हुआ था। 20 शताब्दी के मध्य में इस क्षेत्र में कई अवैध पत्थर की खदानें चल रही थीं और कई वाणिज्यिक संगठन इस क्षेत्र की भूमि पर कब्जा करना चाहते थे । लेकिन जब भारत सरकार को इस क्षेत्र के खतरे का एहसास हुआ तो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत भारत सरकार द्वारा इस संपूर्ण क्षेत्र को कानूनी मान्यता प्रदान की गई वन विहार के इस क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने के लिए सरकार द्वारा विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई थी। वर्ष 1983 में इस समिति की सिफारिश पर सरकार ने 4.45 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया। 

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के प्रबंधन के लिए प्रबंधन योजना के रूप में जगदीश चंद्र, आईएफएस और वन विहार के पूर्व निदेशक द्वारा वर्ष 2000 में पहला तकनीकी दस्तावेज लिखा गया कट्टर संरक्षण और आवास सुधार के उचित उपायों के प्रयासों के परिणामस्वरूप बहुत ही कम समय में इस राष्ट्रीय उद्यान का संवर्धन हुआ और वर्तमान समय में यह मध्यप्रदेश राज्य का एक कुशल और समृद्धि राष्ट्रीय उद्यान है।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :-

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तुओं कै लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है इस राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के लुप्तप्राय और सुंदर वन्यजीवों की प्रजातियां देखने को मिलती है इस उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में बंगाल टाइगर, सफ़ेद टाइगर, भारतीय भेड़िया, जंगली बिल्ली, भालू, लाल लोमड़ी, स्ट्राइप्ड हाइना, भारतीय सियार, जंगली कुत्ता, मोगर, मगरमच्छ, घड़ियाल, नेवला, सांप, अजगर शामिल है
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में बहुतायत मात्रा में सांभर, चीतल, नीलगाय, कृष्णमृग, लंगूर, लाल मुंह वाले बंदर, जंगली सुअर, सेही और खरगोश देखने को मिलते हैं ।

इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की लगभग 250 से अधिक प्रजातियों को चिन्हित किया गया है।  शाम के समय इस राष्ट्रीय उद्यान में इन पक्षियों की चहचहाहट देखने लायक होती है। 

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :- 

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान वनस्पतियों के अलावा कई प्रकार वन्यजीवो के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र है
यहाँ कई प्रकार की वनस्पतियां पाई है जो इस उद्यान के जंगल को समृद्ध बनाती है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पा‌ई जाने वाली वनस्पति दक्षिणी शुष्क पर्णपाती झाड़ी प्रकार की है यहां पाई जाने वाली वनस्पतियों में आंवला, सागौन, डूडी, बेल, अमलतास, साजा, पलास, करधई और तेंदू शामिल हैं। इसके साथ ही यहां कई प्रकार की घास की भी प्रजाति भी पाई जाती है जिनमें दूब, कुसई, लापुसरी, भंजुरा, और फुलेरा शामिल है। इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में बैंगून क्रीपर, मल्कंगनी, करैच, गोमची जैसे बेल वाली वनस्पति भी पाई जाती हैं।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षी :-

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवों के साथ-साथ पक्षियों के निवास के लिए भी काफी मशहूर है इस राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियां देखने को मिलती है जिनमें कुछ प्रवासी पक्षियां भी शामिल है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली पक्षियों में सफेद पीठ वाला गिद्ध , पिंटेल , स्पॉट बिल , ब्राह्मणी बत्तख , गोडवाल , रेड-क्रेस्टेड पोचर्ड , तोता और मोर शामिल है इसके साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान में 60 प्रकार की रंगीन तितलियों की प्रजाति भी पाई जाती हैं।


7. पेंच राष्ट्रीय उद्यान ( Pench National Park )

पेंच राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :-

पेंच राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश राज्य का सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है यह राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश और  महाराष्ट्र की सीमाओं के बीच स्थित है पेंच राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1983 में की गई थी। यह उद्यान सिवनी और छिन्दवाड़ा जिले की सीमाओं पर 292.83 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है 

इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम इसे दो भागों में बांटने वाली पेंच नदी के नाम पर रखा गया है जो इस राष्ट्रीय उद्यान के उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर बहती है या उद्यान मध्य प्रदेश राज्य के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय उद्यान के साथ ही एक महत्त्वपूर्ण बाघ अभयारण्य भी है इस राष्ट्रीय उद्यान को भारत का सर्वश्रेष्ठ बाघ अभयारण्य होने का गौरव प्राप्त है।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान में अनेकों दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीव निवास करते है, हिमालय क्षेत्र के लगभग 210 प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां इस राष्ट्रीय उद्यान में प्रवास के लिए आती है। इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में पाई जाने वाली खूबसूरत झीलें , ऊंचे पेड़ों के सघन झुरमुट , रंगबिरंगे पक्षियों का कलरव , शीतल हवा के झोंके और वन्य प्राणियों का अनूठा संसार यहां आने वाले पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :-

पेंच राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास बहुत पुराना हैं इस राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र की समृद्धि का उल्लेख 16 वीं सदी
में मुगल सम्राट अकबर के शासन काल के समय लिखित आइन - ए अकबरी में भी किया गया है इस राष्ट्रीय उद्यान को मूल रूप से भारत सरकार द्वारा वर्ष 1977 में एक वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था इसके बाद वर्ष 1983 में इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया इसके बाद बाघ परियोजना के तहत वर्ष 1993 में इस राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित किया गया पेंच राष्ट्रीय उद्यान को भारत का सर्वश्रेष्ठ बाघ अभयारण्य ( Tiger Reserve ) होने का गौरव प्राप्त है।

वर्ष 2002 में पेंच राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर  इंदिरा प्रियदर्शिनी राष्ट्रीय उद्यान रख दिया गया इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान को मोगली द्वीप ( Mowgli Land ) के रूप में भी जाना जाता है 

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :-

पेंच राष्ट्रीय उद्यान अनेक प्रकार के वन्यजीवों की प्रजातियां निवास स्थान है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवों में रॉयल बंगाल टाइगर , तेंदुए , सुस्त भालू , चिकारा , चीतल , सांभर और नीलगाय , जंगली भैंस और लगभग 65 बाघ शामिल है।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :- 

पेंच राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवों के साथ-साथ वनस्पतियों के हिसाब से भी काफी समृद्ध और धनी है । इस राष्ट्रीय उद्यान में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और सिवनी जिल के घने जंगल क्षेत्र शामिल है यह राष्ट्रीय उद्यान क‌ई प्रकार के औषधीय पौधों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है । इस उद्यान में औषधीय महत्त्व के दुर्लभ पौधों की 1300 से अधिक प्रजातियां इसके अलावा इस उद्यान में सागौन , बास , सफेद कुल्लू और महुआ के पेड़ बहुतायत मात्रा में पाए जाते है ।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षी :-

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में दुर्लभ जानवरों के साथ ही कई प्रकार के लुप्तप्राय पक्षियों की प्रजातियां निवास करती है शीत ऋतु के समय प्रति वर्ष बर्फीले क्षेत्रों के लगभग 200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां भोजन और प्रजनन के लिए यहां आकर बस जाती है इस राष्ट्रीय उद्यान में निवास करने वाले पक्षियों में मुख्य रूप से रेड जंगल फोल , कोपीजेन्ट , क्रीमसन , बेस्ट डबारबेट , रेड वेन्टेड बुलबुल , रॉकेट टेल डोंगों , मेंगपाई राबिन , लेसर , किस्टल टील , विनेटल सोवेला , तोता , हॉर्नबिल और ब्राह्मणी बत्तख शामिल हैं इसके साथ ही देशभर में तेजी से विलुप्त होती जा रही गिद्ध भी इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुतायत मात्रा में पाये जाते हैं जिनमें से इस राष्ट्रीय उद्यान में दो प्रमुख प्रकार के लाल गिद्ध और सफेद गिद्ध पाये जाते हैं।


8. संजय राष्ट्रीय उद्यान ( Sanjay National Park )

संजय राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :-

संजय राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्य प्रदेश राज्य के सीधी जिले में स्थित एक प्रमुख प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है संजय राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन् 1981 में मध्य प्रदेश में की गई थी संजय- डुबरी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना जाता है वर्तमान समय में यह राष्ट्रीय उद्यान 466.66 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है यह राष्ट्रीय उद्यान संजय-डुबरी टाइगर रिज़र्व का एक हिस्सा है जिसे वर्ष 2008 में बाघ आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था इस बाघ रिजर्व में सोन घड़ियाल अभयारण्य एवं बगदरा अभयारण्य शामिल हैं।

यह क्षेत्र अपने सुंदर वन्यजीवों, वनस्पतियो और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।

संजय राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :- 

संजय राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना मूल रूप से मध्यप्रदेश में सन् 1975 में एक वन्यजीव अभयारण्य में के रूप में की गई थी इसके बाद 1981 में इसे एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया या मध्यप्रदेश के सीधी और सिंगरौली जिले में स्थित है लेकिन मूल रूप से इसका अधिकांश भाग मध्यप्रदेश के सीधी जिले में ही स्थित है 1 नवंबर 2000 से पहले यह मध्यप्रदेश राज्य का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान उस समय इस राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल 1906.66 वर्ग किलोमीटर था लेकिन 1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश का विभाजन हुआ और छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य बना तो इसका अधिकांश भाग ( 1440 वर्ग किलोमीटर ) छत्तीसगढ़ के पास चला गया बाद में छत्तीसगढ़ राज्य ने इसका नाम गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान रख दिया। जबकि इस राष्ट्रीय उद्यान का शेष बचा हुआ ( 466.66 वर्ग किलोमीटर ) भाग मध्यप्रदेश के पास ही रहा।

वर्ष 2008 में बाघ परियोजना ( Project Tiger ) के तहत संजय राष्ट्रीय उद्यान को एक बाघ रिजर्व घोषित किया गया।

संजय राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव और वनस्पति :- 

संजय डूबरी राष्ट्रीय उद्यान सुंदर क‌ई प्रकार के सुंदर और लुप्तप्राय वन्यजीवों और वनस्पतियों के लिए काफी मशहूर है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवों में बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ, चित्तीदार हिरण, सांभर हिरण, जंगली सूअर, नीलगाय, चिंकारा, सेही, गोह आदि शामिल हैं।

वर्ष 2004 में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वन्यजीवों की  आधिकारिक जनगणना की गई इस जनगणना के अनुसार उस समय संजय संजय राष्ट्रीय उद्यान में सिर्फ 6 बाघ थे लेकिन अक्टूबर 2008 से मई 2009 के बीच इस राष्ट्रीय उद्यान में कोई भी बाघ नहीं देखा गया लेकिन वर्तमान समय में इस राष्ट्रीय उद्यान में गिने - चुने संख्या में कुछ बाघ है इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में कई वनस्पतिय और वृक्षों की प्रजातियां भी पाई जाती है। इस उद्यान में मुख्य रूप से साल, बांस और मिश्रित वन पाए जाते हैं।

संजय राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षी :- 

संजय डूबरी राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवों और वनस्पतियों के साथ-साथ पक्षियों के लिए भी एक मुख्य आकर्षण का केंद्र है इस राष्ट्रीय उद्यान में 309 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है इन पक्षियों की प्रजातियों में सबसे आकर्षक पक्षियों में गोल्डन हेडेड ओरियल, रैकेट पूंछ ड्रोंगो, लेसर एडजुटेंट, लाल सिर वाला गिद्ध, सॅनरस गिद्ध, भारतीय तोता, कोवा, सफेद पूंछ वाला गिद्ध, मिस्र का गिद्ध, नाईटजार्स और कई अन्य प्रजातियों के पक्षी शामिल हैं।


9. फॉसिल जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान ( Fossil National Park )

जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :-

मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में स्थित घुघवा जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान या फॉसिल जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश राज्य का एक अनूठा राष्ट्रीय उद्यान है इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1968 में की गई थी 1983 में इसे घुघुवा जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया यह मध्य प्रदेश राज्य का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है लेकिन यह एशिया का सबसे बड़ा जीवाश्म उद्यान है । यह राष्ट्रीय उद्यान पुरातत्त्व प्रेमियों के लिए बेहद खास स्थान है इस राष्ट्रीय उद्यान में पौधों के 6.5 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्मों के ऐतिहासिक साक्ष्य का प्रमाण मिलता है।

इस जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान में एक आकर्षण जीवाश्म संग्रहालय भी है इस संग्रहालय में कई प्रकार के बीज और पत्ती के जीवाश्म को संरक्षित करके रखा गया है इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान के कई खुली जगहों पर महत्त्वपूर्ण जानकारी भी अंकित की गई जो जिससे इस उद्यान के भौगोलिक क्षेत्र के लाखों साल पुराने इतिहास के बारे में पता चलता है।

फॉसिल जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले जीवाश्म :-

0.270 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले फॉसिल राष्ट्रीय उद्यान में ' भूतल जीवाश्म ' रखे गये है इस राष्ट्रीय उद्यान में लाखो साल पुराने पौधों , पत्तियों , फूलों , फलों और बीजों के संरक्षित जीवाश्म देखने को मिलते है सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार इन जीवाश्म पौधों में डायकोटाइलडन और पाम इस राष्ट्रीय उद्यान के कुछ ऐसे जीवाश्म पौधे है जिन्हें प्राचीन समय में भारत में कुछ चुनिन्दा जगहों पर ही देखने को मिलते थे । जबकि यूकेलिप्टस जीवाश्म को अब तक का सबसे पुराना जीवाश्म माना जाता है यहां पाए जाने वाले नीलगिरी के पेड़ों के जीवाश्म मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते थे इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले अन्य जीवाश्म पौधों में खजूर , जामुन , केला , रुद्राक्ष और आंवला शामिल हैं । इसके अतिरिक्त किस राष्ट्रीय उद्यान में कुछ जानवरों के जीवाश्म भी पाए गए हैं 


यह जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान मूल रूप से नीलगिरि जीवाश्म के लिये जाना जाता है जिसे सबसे पुराना जीवाश्म माना जाता है। इस जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान में अब तक 18 पादप प्रजातियों के 31 परिवारों के पौधों के जीवाश्म की खोज की जा चुकी है।


10. ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान ( omkareshwar National Park )

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :-

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले में स्थित मध्यप्रदेश राज्य का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है  ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 2004 में की गई थी इस उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 293 वर्ग किलोमीटर है। यह राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में इंदिरा सागर जलाशय और ओंकारेश्वर जलाशय से घिरे एक सघन वन क्षेत्र मे फैला हुआ है।

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव और वनस्पति :-

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो और वनस्पतियों के कारण यह पर्यटकों के लिए एक मुख्य आकर्षण का केन्द्र बनता जा रहा है। इस राष्ट्रीय उद्यान का वन क्षेत्र विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों, बहुरंगी फूलों से लदी झाड़ियों, घास के हरे भरे मैदानों से भरा पड़ा है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली अन्जन वृक्षों का विशाल समूह एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है इसके साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान में बहने वाली   बारहमासी झरने अत्यंत आकर्षक दिखाई देती है।

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में बाघ , चीता, निलगाय, सांभर, चीतल, चिंकारा, बायसन जैसे वन्यजीव शामिल हैं इसके अलावा वन्य प्राणियों को सुरक्षित, प्राकृतिक और अनुकूल वातावरण प्रदान करने और विभिन्न पक्षी प्रजातियों के निवास के लिए इस राष्ट्रीय उद्यान में उचित उपाय किया जा रहा है।


11. डायनासोर जीवाश्म उद्यान ( Dinosaur Fossil National Park )

डायनासोर जीवाश्म उद्यान की स्थापना, इतिहास एवं पाए जाने वाले जीवाश्म :-

डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित है डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 2011 में की गई थी यह उद्यान धार जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूरी पर स्थित कुक्षी तहसील की बाग गुफाओं के बीच लगभग 0.89 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार धार जिले के इस उद्यान क्षेत्र में वर्ष 2006 में डायनासोर के कम से कम 100 अंडों की खोज की ग‌ई थी अंडों के साथ डायनासोर के घरौंदे भी जीवाश्मकृत अवस्था में पाए गए हैं वैज्ञानिकों के अनुसार डायनासोर के यह जीवाश्म लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पुराना है।
डायनासोर के अंडों के अलावा यहां सितारा मछली, अनेक प्रकार के जीव जंतुओं के जीवाश्म, शंख और पेड़ों के जीवाश्म भी मिले हैं।


12. कूनो राष्ट्रीय उद्यान ( Kuno National Park )

कूनो राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :- 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है यह राष्ट्रीय उद्यान भारत के मध्य प्रदेश राज्य में एक संरक्षित क्षेत्र है इसे 2018 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था लेकिन इसकी स्थापना सन् 1981 मे कूनो वन्य अभयारण्य के रूप में की गई थी। उस समय इस वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 344.68 वर्ग किलोमीटर (133.08 वर्ग मील) के प्रारंभिक क्षेत्र के साथ की गई थी लेकिन बाद में इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के क्षेत्र में वृद्धि की गई और वर्तमान समय में इस राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 748.76 वर्ग किलोमीटर है।

कुनो को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने का उद्देश्य गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान से एशियाई शेरों यहां पर स्थानांतरित करना था  राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने से पहले कुनो एक वन्यजीव अभ्यारण्य था कूनो राष्ट्रीय उद्यान को , पालपुर - कुनो वन्यजीव अभ्यारण्य भी कहा जाता है । 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान अनेक प्रकार के वन्यजीवों छोटे और बड़े स्तनधारियों , कई प्रजातियों के सरिसृपो और लगभग 129 पक्षियों की प्रजातियों का निवास स्थान है इसके साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवों के साथ-साथ वनस्पतियों की भी भरमार है यहां वनस्पतियों की भी कई प्रजातियां पाई जाती है इन सभी के कारण कूनो राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

कुनो राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :-

कुनो वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 1981 में लगभग 344 वर्ग किलोमीटर के प्रारंभिक क्षेत्र के साथ की गई थी इसके प्रश्चात 1990 के दशक में इस अभयारण्य में एशियाई शेरों प्रजनन परियोजना को लागू करने के लिए एक संभावित क्षेत्र के रूप में चुना गया इसके बाद वर्ष 2009 में इस वन्यजीव अभयारण्य के आसपास के 924 वर्ग किलोमीटर ( 357 वर्ग मील ) के क्षेत्र को बफर जोन के रूप में मानव बस्तियों में जोड़ा गया था 2009 में , कुनो वन्यजीव अभयारण्य को भारत में चीता के पुनः उत्पादन के लिए एक संभावित स्थल के रूप प्रस्तावित किया गया था दिसंबर 2018 में मध्यप्रदेश सरकार ने कूनो वन्यजीव अभयारण्य को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया और संरक्षित क्षेत्र को 413 वर्ग किलोमीटर ( 159 वर्ग मील ) तक बढ़ा दिया गया । 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :-

कूनो राष्ट्रीय उद्यान क‌ई प्रजातियों के वन्यजीवों का निवास स्थान है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में भारतीय तेंदुआ , जंगली बिल्ली , सुस्त भालू , भारतीय भेड़िया , सियार , धारीदार , भारतीय खरगोश , लकड़बग्घा और बंगाल लोमड़ी , चीतल , सांभर हिरण , नीलगाय , चार सींग वाले मृग , चिंकारा , ब्लैकबक और जंगली सूअर , शेर , भारतीय ग्रे मंगोल , सुर्ख मंगोल , छोटे एशियाई मंगोल ,  ग्रे लंगूर शामिल हैं जबकि इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले सरीसृपों में मगरमच्छ , बंगाल मॉनीटर और भारतीय सॉफ्थेलस कछुए किंग कोबरा और भी क‌ई जहरीले सांपों की प्रजातियां पाई जाती है। 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :-

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवो के साथ ही क‌ई प्रकार के वनस्पतियों की प्रजातियां भी पाई जाती है इस संरक्षित क्षेत्र की वनस्पतियों में एनोगाइसस पेंडुला वन और स्क्रब , बोसवेलिया और ब्यूटिया वन , शुष्क सवाना वन और घास के मैदान और उष्णकटिबंधीय नदी के जंगल शामिल हैं जबकि इस राष्ट्रीय उद्यान की प्रमुख वृक्ष प्रजातियों में बबूल, साल , तेंदू डायोस्पायरोस मेलानोक्सिलीन , पलाश , ढोक एनोगिअसस लेटिफोलिया , एकैकोस ल्यूकोफोलिया , जिजिपस मौरिटेरिना और जिजिपस जाइलोपाइरस शामिल है जबकि इस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली प्रमुख झाड़ीदार प्रजातियों में प्रेया फ्लेवसेन्स , हेलिसटेरेस इसोरा , हाँपबुश विस्कोसा , वीटेक्स नेगुंडो शामिल हैं इसके अलावा इस उद्यान की प्रमुख घास की प्रजातियों में हेटरोपोगोन कंटूरस , अप्लुड़ा म्यूटिका , एरिस्टिडा हिस्ट्रिक्स , थेन्डा वचाझिवाल्विस और सेन्क्रस क्यूनिगिस  शामिल हैं 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षी :-

कूनो राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवों के साथ-साथ अनेक प्रजातियों के पक्षियों का भी निवास स्थान है 2007 में इस राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवो और सर्वेक्षण किया गया इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार इस राष्ट्रीय उद्यान में कुल 129 पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली पक्षियों में भारतीय सफेद पीठ वाला गिद्ध , लाल गिद्ध , मिस्र का गिद्ध  , क‌ई प्रकार के बाज ,  चित्तीदार उल्लू पश्चिमी मार्श - हैरियर , पाइड हेरियर , मोंटागु के हेरियर ,  भारतीय मौर , ग्रे फ्रेंकोलिन , यूरेशियन नाइटजर , जंगली नाइटजर , सारस , तोता और इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर शामिल हैं।


इन्हें भी देखें :-











एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Featured Post

SSC GD General Science Question and answer in Hindi 2021