भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन स्थापना, मुख्यालय, अध्यक्ष एवं मिशन।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना, मुख्यालय, अध्यक्ष एवं सभी प्रमुख मिशन: gyan-ganga.com


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
संक्षिप्त रूप
इसरो (ISRO)
स्थापना
15 अगस्त 1969
मुख्यालय
बंगलौर, कर्नाटक
संस्थापक
विक्रम साराभाई
आदर्श वाक्य
मानव जाति की सेवा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
अध्यक्ष
डॉ. के. सिवान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) की स्थापना :- इसरो की स्थापना 15 अगस्त 1969 को माना जाता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना मूलतः 15 अगस्त 1962 को किया गया था उस समय परमाणु विभाग के तत्कालीन निदेशक ‘होमी भाभा’ ने अंतरिक्ष में अनुसंधान के लिए भारतीय समिति का गठन किया जिसका नाम ‘अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय समिति'(The Indian National committee for space research) रखा गया जबकि संक्षिप्त रूप से इस संगठन को इनकोसपार कहा जाता था और डॉ. विक्रम साराभाई को इस समिति अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम विक्रम साराभाई की ही संकल्पना थी इसी कारण डॉ. विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है।

15 अगस्त 1969 को इनकोसपार का नाम बदलकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research organisation) कर दिया गया जिसे संक्षिप्त रूप से इसरो के नाम से जाना जाता है। इसरो का मुख्यालय कर्नाटक के बंगलौर में है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारत का एकमात्र राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मुख्य कार्य :- यह भारत का एकमात्र राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान में इसका मुख्यालय कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में है। इस संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिए अंतरिक्ष संबंधी तकनीकों का विकास करना तथा विभिन्न राष्ट्रीय कार्यों के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उसके उपयोगों का विकास करना है इसके साथ ही स्वदेशी उपग्रह व उपग्रह प्रक्षेपण यानो का विकास करना है। इसरो भारत सरकार की अंतरिक्ष विभाग के प्रशासकीय नियंत्रण के अधीन एक संगठन है यह संगठन प्रधानमंत्री व अंतरिक्ष आयोग के अधीन कार्य करता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) के अध्यक्ष :- इसरो के वर्तमान अध्यक्ष के. सिवान है के सिवान इसरो के दसवें अध्यक्ष है।

1 इसरो के प्रथम अध्यक्ष डॉ विक्रम साराभाई थे जो 1963 से 1972 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया विक्रम साराभाई 9 वर्षों तक इसरो के अध्यक्ष पद पर रहे हैं। इन्होंने ही केरल के तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र की स्थापना की।

2 इसरो के दूसरे अध्यक्ष जे.के. मैनन थे जिन्होंने लगभग 9 महीने, जनवरी 1972 से सितंबर 1972 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

3 सतीश धवन को इसरो का तीसरा अध्यक्ष नियुक्त किया गया जिन्होंने 1972 से 1984 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया इसके साथ ही सतीश धवन सबसे लम्बे समय तक इसरो के अध्यक्ष पद पर रहने वाले वाले एकमात्र व्यक्ति हैं इन्हीं के नाम पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में एक अंंतरिक्ष केन्द्र ‘शतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र की स्थापना की गई  इस अंतरिक्ष केंद्र के मे ही इसरो के अधिकांश सेटेलाइट एवं मिसाइलों का परीक्षण किया जाता है।

4 इसरो के चौथे अध्यक्ष प्रोफेसर उडूपी रामचंद्र राव थे जिन्होंने 1984 से 1994 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया ये लगभग 10 वर्षों तक इसरो के अध्यक्ष रहे।

5 डॉ. कृष्णस्वामी कस्तूरीरंगन इसरो के पांचवें अध्यक्ष बने के. कस्तूरीरंगन 1994 से 2003 तक इसरो के अध्यक्ष पद पर रहे इन्होंने करीब 9 वर्षों तक इसरो के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला।

6 जी. माधवा नायर को इसरो के छठे अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया जिन्होंने 2003 से 2009 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

7 के. राधाकृष्णन इसरो के सातवें अध्यक्ष थे जो 2009 से 2014 तक इसरो के अध्यक्ष पद पर रहे इन्होंने करीब 5 वर्षों तक इसरो के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला

8 शैलेश नायक को इसरो का आठवां अध्यक्ष नियुक्त किया गया यह 1 जनवरी 2015 से 12 जनवरी 2015 तक इसरो के अध्यक्ष रहे ये इसरो के एकमात्र ऐसे अध्यक्ष बने जो मात्र 12 दिनों तक इसरो के अध्यक्ष रहे।

ए.एस. किरण कुमार इसरो के 9वें अध्यक्ष बने जिन्होंने 2015 से 2008 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया इसरो के अध्यक्ष पद पर रहने की इनकी कार्य अवधि 3 वर्ष थी।

10 के सिवान इसरो के दसवें एवं वर्तमान अध्यक्ष हैं जनवरी 2018 को इन्हे इसरो के 10वें अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख मिशन :-

आर्यभट्ट :- भारत की पहली सेटेलाइट आर्यभट्ट को 19 अप्रैल 1975 को रूस की सहायता से अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक लांच किया गया इस सैटेलाइट को कॉसमॉस m3 रॉकेट से के द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया था तथा इस सेटेलाइट को रूस के कासपुतिन प्रक्षेपण यान के द्वारा प्रक्षेपित किया गया था उस समय इसरो के अध्यक्ष सतीश धवन थे।

चंद्रयान-1 :- चंद्रयान-1 की घोषणा प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के द्वारा 2001 में किया गया था चंद्रयान-1 को 22 अक्टूबर 2008 को लांच किया गया इस समय इसरो के अध्यक्ष माधवा नायर थे चंद्रयान-1 को पीएसएलवी सी-11 प्रक्षेपण यान के द्वारा लांच किया गया चंद्रयान-1 का  वजन 13800 किलोग्राम था तथा इसकी कुल लागत 540 करोड़ रुपये थी स्वदेशी रूप से विकसित यह भारत का पहला चंद्र मिशन था जिसमें इसरो ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त किया चंद्रयान-1 चांद के उत्तरी ध्रुव में भेजा गया था। इस मिशन केेे द्वारा ही चंद्रमा की सतह पर ऑक्सीजन सिलिकॉन और मैग्नीशियम होने की संभावना का पता लगाया गया लेकिन 10 महीने बाद इस मिशन को टर्मिनेट करना पड़ा क्योंकि इसमें लगाया गया 5 डीसी लगााार नष्ट हो गया लेकिन नासा के द्वारा इस सेटेलाइट को खोज लिया गया।

मंगलयान मिशन :- इसरो ने 2013 में मंगलग्रह पर एक सेटेलाइट भेजने की योजना बनाई इस मिशन का नाम मंगलयान रखा गया इसके बाद 5 नवम्बर 2013 को इसरो ने अपने पहले प्रयास में ही भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित ‘मंगलयान मिशन’ को मंगल ग्रह पर सफलता लॉन्च किया इसे पीएसएलव सी-25 प्रक्षेपण यान के द्वारा प्रक्षेपित किया गया इसके साथ इसरो की वजह से भारत मंगल ग्रह पर सैटेलाइट भेजने वाला एशिया का पहला देश बना इसके साथ ही भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बना जिसने अपने पहले ही प्रयास में किसी सेटेलाइट को मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक स्थापित किया। 

इसरो का विश्व रिकॉर्ड मिशन :- फरवरी 2017 में इसरो ने अपनी 39वीं में उड़ान में इतिहास रचते हुए हुए एक ही प्रक्षेपण यान जिसका नाम पीएसएलवी सी-37 है के द्वारा 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया और पूरे विश्व में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। इसरो दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने एक ही प्रक्षेपण यान से एक साथ 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया लेकिन हाल ही में इसरो की इस रिकॉर्ड को अमेरिकी स्पेस कंपनी ‘स्पेसएक्स’ में तोड़ दिया है स्पेसएक्स ने साल 2021 में एक ही प्रक्षेपण यान से 143 उपग्रहों को सफलतापूर्वक लांन्च किया।

चंद्रयान-2:- चंद्रयान-2 की घोषणा 18 सितंबर 2008 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था लेकिन चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को दोपहर 2:43 पर लॉन्च किया गया चंद्रयान-2 को के सिवान की अध्यक्षता में लॉन्च किया गया यह चंद्र मिशन भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का इकलौता ऐसा मिशन था जिसे चांद के दक्षिणी ध्रुव में उतारने का लक्ष्यय रखा गया था इस मिशन का बजट 978 करोड रुपया था। चंद्रयान-2 का वजन 3850 किलोग्राम था इसे जीएसएलवी MP3 प्रक्षेपण यान के द्वारा लांच किया गया था जीएसएलवी MK3 को बावली रॉकेट जाता है क्योंकि यह भारत का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान है। चंद्रयान-2 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था चंद्रयान-2 मिशन तीन भागों में विभाजित था जिसमें एक लैंडर,एक रोबोर और एक आर्बिटर शामिल था। चंद्रयान-2के रोवर का नाम प्रज्ञान था तथा इसका वजन 27 किलोग्राम था इसके लैंडर का नाम विक्रम रखा गया था और इसका वजन 1471 किलोग्राम था जबकि चंद्रयान-2 के आर्बिटर का वजन 2379 किलोग्राम था chandrayaan-2 मिशन के परियोजना निदेशक मुथया वनिता थी तथा इस मिशन के मिशन निदेशक रितू करिधल थी। लेकिन अफसोस कि इसरो का चंद्रयान-2 सफल नहीं हो पाया लेेेकिन ने हार नहीं मानी 2024 तक इसरो ने पुनः एक चंद्र मिशन चंद्रयान 3 को लॉन्च करने का निर्णय लिया है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने कार्य के बलबूते पर दुनिया में अपनी एक अलग पहचान दी है। इसरो को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ अंतरिक्ष संगठनों में से एक माना जाता है जो भारत के लिए बड़े गर्व की बात है। इसरो के द्वारा समय-समय पर बहुत सारी मिसाइलों का परीक्षण भी किया जाता है हाल ही में इसरो ने ऐमेजोनिया-1 मिसाइल का सफल परीक्षण किया दुनिया के सबसे बड़े जंगल अमेज़न जंगल जो ब्राजील में है की निगरानी रखेगा। इसके अतिरिक्त भारत का एकमात्र अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन जो वर्तमान समय में तेजी से अपना विकास कर रहा है।

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