जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड । Jim Corbett National Park Uttarakhand

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड । 

Jim Corbett National Park Uttarakhand 

Jim Corbett National Park

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना इतिहास वन्यजीव एवं इस राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित सभी जानकारी – 

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :- 

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, भारत के उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल जिले के रामनगर के निकट स्थित भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है। इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन् 1936 में लुप्तप्राय ‘ बंगाल टाइगर ‘ की रक्षा एवं बचाव के उद्देश्य से किया गया था। उस समय इस राष्ट्रीय उद्यान को ‘ हैली राष्ट्रीय उद्यान ( Hailey National Park ) ‘ के रूप में स्थापित किया गया था।

1956 में इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया जिन्होंने इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान बाघ परियोजना पहल के तहत ‘ बाघ परियोजना ‘ में शामिल होने वाला भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान था यह राष्ट्रीय उद्यान वर्तमान में भारत का एक प्रसिद्ध और गौरवशाली पशु विहार है जो उत्तराखंड के पातलीदून घाटी में 1318.54 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें से  821.99 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का ‘ जिम कॉर्बेट व्याघ्र संरक्षित ‘ क्षेत्र भी शामिल है।


जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास :

प्रसिद्ध वन्यजीव संरक्षणवादी, शिकारी और एक बेहतरीन लेखक ‘ जिम कॉर्बेट ‘ ने सन् 1930 में बाघ संरक्षण के लिए इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र की स्थापना में ब्रिटिश सरकार की काफी सहायता की। इसके प्रश्चात ब्रिटिश सरकार ने सन् 1936 में लुप्तप्राय बंगाल बाघ के संरक्षण के लिए इस क्षेत्र के लगभग 300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को हैली नेशनल पार्क के नाम से एक वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र के रूप में स्थापित किया।

1955-1956 में भारत सरकार ने बाघ आरक्षित इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र का नाम बदलकर जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान रख दिया।

वन्यजीवन के संरक्षण में जिम कार्बेट के योगदान के लिए इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान रखा गया इसके साथ ही उन्होंने इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना में‌ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वर्ष 1974 में एक प्रतिष्ठित वन्यजीव संरक्षण अभियान के तहत बाघ परियोजना शुुरू करने के लिए जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान को चुना गया। इसके बाद 1991 में कालागढ़ वन प्रभाग के तहत सोनांडी वन्यजीव अभयारण्य के संपूर्ण क्षेत्र को जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के साथ जोड़ दिया गया।


जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव :-

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान शुरू से ही पशुवर्ग के‌ निवास के लिए अनुकूल स्थान हैं । इस राष्ट्रीय उद्यान में स्तनधारियों की 50 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से इस राष्ट्रीय उद्यान में विशेष रूप से एशियाई हाथी और घड़ियाल पाए जाते है इसके साथ ही यह उद्यान कई लुप्तप्राय जानवरों के साथ – साथ गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों के वन्यजीवों का निवास स्थान है । इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में शेर, हाथी, भालू, बाघ, सुअर, हिरन, चीतल, साँभर, पांडा, काकड़, नीलगाय, चीता आदि की सबसे अधिक संख्या पाई जाती है । 

इसके साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्र में सरीसृपों की 25 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें अजगर, किंग कोबरा सहित कई प्रकार के जहरीले साँपो की प्रजातियां पाई जाती हैं इसके अतिरिक्त इस उद्यान में सरीसृप वर्ग के लुप्तप्राय ‘ मुगर मगरमच्छ ‘ भी पाए जाते हैं।


जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षी :- 

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान को पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग के सामान माना जाता है क्योंकि इस राष्ट्रीय उद्यान में 580 रंग – बिरंगे पक्षियों की प्रजातियाँ देखने को मिलते हैं जिनमे ग्रेट चितकबटा, हॉर्नबिल, सफेद पीठ वाला गिद्ध , मोट , हॉजसन बुटाचैट नाटगी स्तन वाले हटे कबूतर, गोल्डन ईगल, उल्लू आदि शामिल हैं । 


जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति :-

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान लुप्तप्राय वन्यजीवो की प्रजाति के साथ-साथ लुप्तप्राय औषधीय वनस्पतियों की प्रजातियों के कारण भी प्रसिद्ध है यह राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवो के साथ – साथ वनस्पतियों की विशाल जैव विविधता का एक प्रमुख केंद्र है

भारत के वनस्पति सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के इस संपूर्ण क्षेत्र में वनस्पतियों की लगभग 800 प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें से 488 पौधों की प्रजातियां पाई जाती है । इन प्रजातियों में पर्वतारोही घास , बाँस की झाड़ियाँ , फर्न आदि शामिल हैं । 

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान विविध वनस्पतियों के अनुसार बहुत धनी है इस राष्ट्रीय उद्यान में पेड़ों की 220 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से साल वृक्ष, रोहिणी, पीपल और आम के वृक्ष बहुत ही ज्यादा मात्रा में पाए जाते है जो इस राष्ट्रीय उद्यान के आरक्षित क्षेत्र के लगभग 73 प्रतिशत भाग को कवर करता है। 

इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में एकमात्र शकुधाटी वृक्ष पाए जाते है इस राष्ट्रीय उद्यान में क‌ई प्रकार के प्रजातियो के खुबसूरत पेड़ – पौधे के साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान में  सफेद टमाटर के गुलाबी फूल ( काचरन ), विशाल लाल फूल ( सेमल ), चमकीले नाटगी फूल ( ढाक ) और भी कई तरह के खूबसूरत फूल देखने को मिलते है इन फूलों की सुंदरता देखन लायक होती है जो इस राष्ट्रीय उद्यान की सुंदरता को बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं इसके साथ ही ये फूल पर्यटकों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं भी जाते हैं।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में उपलब्ध सेवाएं :- 

वर्तमान समय में जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान इतना समृद्ध है कि इस उद्यान के अतिथि-गृह में 200 लोगों के एक साथ ठहराने की व्यवस्था है। इस राष्ट्रीय उद्यान में सुन्दर अतिथि गृह के साथ – साथ केबिन और टेन्ट भी उपलब्ध है। इस राष्ट्रीय उद्यान में खाने का भी उत्तम प्रबन्ध है इसके साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान में सभी प्रकार की सुविधा उपलब्ध है।


जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य :- 

• जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे पुराना एवं भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है।

• जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1936 में प्रसिद्ध बंगाल टाइगर की रक्षा के लिए किया गया था।

• जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत के उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में स्थित है। 

• इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना के समय इसका नाम हैली राष्ट्रीय उद्यान था लेकिन 1956 में इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान रख दिया गया।

इन्हें भी देखें :-

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