भारत की शास्त्रीय भाषाएं । Classical Language of India in Hindi

भारत की शास्त्रीय भाषाएं ।

Classical Language of India in Hindi

भारत की शास्त्रीय भाषा


भारत की शास्त्रीय भाषाएं एवं उनका महत्त्व –

भारत एक विभिन्न भाषाओं का देश है इन सभी भाषाओं का प्रत्येक वर्ष एक साहित्यिक सम्मेलन ‘ अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन ‘ का आयोजन होता है अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन मराठी लेखकों द्वारा आयोजित किया जाने वाला एक प्रमुख वार्षिक सम्मेलन है इसकी स्थापना सन् 1878 में की गई थी 

महान साहित्यकार, पर्यावरणविद् और पादरी ‘ फ्रांसिस द ब्रिटो ‘ इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले प्रथम ईसाई थे।

93 वें ‘ अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन ‘ में मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने की घोषणा की गई इसके तहत एक प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन अभी भी मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता नहीं मिली है।


भारत की शास्त्रीय भाषाएं

वर्तमान में भारत में 6 शास्त्रीय भाषाएं हैं, भारत में अभी तक छह भाषाओं तमिल, संस्कृत, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है ।

भारत के सभी छ: शास्त्रीय भाषाएं एवं उनके घोषि वर्ष –

1. तमिल – 2004

2. संस्कृत – 2005

3. तेलुगु – 2008

4. कन्नड़ – 2008

5. मलयालम – 2013

6. ओडिया – 2014


किसी भी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने के लिए निम्नलिखित मानदंड होना आवश्यक है –

• इतिहास में 1500 से 2000 वर्षों एतिहासिक अवधि में प्रारंभिक ग्रंथों और पौराणिक ग्रंथों में इस भाषा की मान्यता दर्ज होनी चाहिए । 

• उस भाषा का प्राचीन साहित्य/ग्रंथों का एक समूह होना चाहिए जिसे वक्ताओं की पीढ़ियों द्वारा एक मूल्यवान विरासत माना जाता है।

• इन भाषाओं की साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और किसी अन्य भाषा समुदाय से उधार नहीं लिया गया हो।  

• शास्त्रीय भाषा और साहित्य आधुनिक भाषा और साहित्य से अलग होने के कारण, शास्त्रीय भाषा और उसके बाद के रूपों या उसकी शाखाओं के बीच एक असंतुलन हो सकता है।

संस्कृति मंत्रालय ने क‌ई संस्थानों को सूचीबद्ध किया जो शास्त्रीय भाषाओं को समर्पित हैं ये संस्थान है –

• शास्त्रीय भाषा संस्कृत के लिए समर्पित संस्थान :-

  • राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली
  • महर्षिसांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन  राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति 
  • श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली 

• शास्त्रीय भाषा ‘ तेलुगु और कन्नड़ ‘ के लिए समर्पित संस्थान : 

वर्ष 2011 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की।

• तमिल के लिए समर्पित संस्थान : 

  • केंद्रीय शास्त्रीय संस्थान तमिलनाडु (सीआईसीटी), चेन्नई

शास्त्रीय भाषाओं को प्रोत्साहन

केंद्र सरकार द्वारा साहित्य भाषाओं के प्रोत्साहन के लिए कई कदम उठाए जाते हैं जिनमें से कुछ निम्न है –

• शास्त्रीय भारतीय भाषाओं में प्रतिष्ठित विद्वानों के लिए प्रत्येक वर्ष दो प्रमुख वार्षिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिये जाते हैं।

• शास्त्रीय भाषाओं में अध्ययन के लिए क‌ई उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है  

• केंद्रीय विश्वविद्यालयों, शास्त्रीय भाषाओं के विकास के लिए एक निश्चित संख्या में व्यावसायिक अध्यक्षों की घोषणा की है

• आईओ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) भी इन भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए क‌ई अनुसंधान परियोजनाओं को पुरस्कार देता है।  संस्कृति मंत्रालय ने कहा है कि यूजीसी ने 2016-17 में 56.74 लाख रुपये और 2017-18 में 95.67 लाख रुपये की धनराशि जारी की।

भारतीय शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित कुछ पूछें जाने वाले प्रश्नोत्तर – 

1. भारत में सर्वप्रथम किस भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा कब दिया गया ?

उत्तर :- सर्वप्रथम तमिल भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया तमिल भाषा को वर्ष 2004 में भारत के प्रथम शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी गई।


2. तेलुगु भाषा को किस वर्ष भारत की शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया गया ?

उत्तर :- 2008


3. वर्तमान में भारत सरकार द्वारा कुल कितनी भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है ?

उत्तर :- वर्तमान में भारत सरकार द्वारा 6 भाषाओं तमिल, संस्कृत, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और ओडिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है।


4. भारत की सबसे पुरानी शास्त्रीय भाषा कौन सी है ?

उत्तर :- तमिल


5. वर्ष 2008 में किन दो भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया ?

उत्तर :- तेलुगु और कन्नड़


इन्हें भी देखें –

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