National Park and Wildlife Sanctuary in Maharashtra in Hindi 2023

10 National Park and Wildlife Sanctuary in Maharashtra in Hindi । महाराष्ट्र के शीर्ष 10 राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य 

1. तडोबा अंधारी राष्ट्रीय उद्यान और बाघ रिजर्व , चंद्रपुर ( Tadoba National Park and Tiger Reserve , Chandrapur )

National Park and Wildlife Sanctuary in Maharashtra

तडोबा अंधारी राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना

तडोबा अंधारी राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित महाराष्ट्र राज्य का सबसे बड़ा महाराष्ट्र में सबसे बड़ा और सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है यह महाराष्ट्र के चिमूर पहाड़ियां , मोहरली और कोलसा पर्वतमाला के बीच स्थित है इसकी स्थापना वर्ष 1955 में की गई थी यह राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र राज्य का दूसरा टाइगर रिजर्व एवं भारत का 41 वां टाइगर रिजर्व है |

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान कुल 625.4 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है  जिसमें 577.96 वर्ग किलोमीटर ( 223.15 वर्ग मील ) आरक्षित वन और 32.51 वर्ग किलोमीटर ( 12.55 वर्ग मील ) संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं । 

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान अनेक प्रकार के वन्यजीवों के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है इस राष्ट्रीय उद्यान में बाघ , तेंदुआ , लकड़बग्घा , सुस्त भालू , जंगली कुत्ते , सियार , भौंकने वाले हिरण , बाइसन , सांभर आदि जानवरों की एक विस्तृत श्रृंखला देखने को मिलती है ।

मुख्य रूप से यहां पाए जाने वाले बाघ के लिए यह भारत के सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है 2018 की जनगणना के अनुसार इस राष्ट्रीय उद्यान लगभग 88 बाघ है इस जनगणना के अनुसार इस उद्यान में पक्षियों की 195 प्रजातियाँ और तितलियों की 74 प्रजातियाँ भी पाई जाती है मई 2018 में इस एक ब्लैक पैंथर देखा गया था जो एक दुर्लभ दृश्य है क्योंकि ब्लैक पैंथर आमतौर पर सदाबहार जंगलों में रहते हैं लेकिन तडोबा में शुष्क पर्णपाती जंगल पाए जाते हैं।

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास

प्राचीन समय में इस राष्ट्रीय उद्यान का वन क्षेत्र गोंड राजाओं का प्रमुख शिकार स्थल था लेकिन सन् 1935 में यहां शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया इसके बाद सन् 1955 में भारत सरकार द्वारा महाराष्ट्र के ताडोबा वन क्षेत्र के 116.54 वर्ग किमी के क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया|

सन् 1986 में इस राष्ट्रीय उद्यान के समीप अंधेरी वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना की गई इसके बाद  वर्ष 1995 में बाघ परियोजना ( Project Tiger ) के तहत इन दोनों वन्यजीव अभयारण्यों को मिलाकर इसे एक बाघ रिजर्व घोषित किया गया जिसे टाडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व के रूप में जाना जाता है यह भारत का 41 वां टाइगर रिजर्व है।

तडोबा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान कई प्रकार के वन्यजीवों का निवास स्थान है यह राष्ट्रीय उद्यान कई प्रजातियों के स्तनधारियों , सरिसृपो एवं पक्षियों का घर है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में बंगाल टाइगर , भारतीय तेंदुए , सुस्त भालू , गौर , नीलगाय , ढोल , धारीदार लकड़बग्धा , छोटी भारतीय सिवेट , जंगली बिल्ली , सांभर , भौंकने वाले हिरण , चीतल , चौसिंघा और भारतीय पैंगोलिन शामिल हैं |

इसके अतिरिक्त इस उद्यान में पाई जाने वाली सरिसृपों की प्रजातियों में दलदली मगरमच्छ और लुप्तप्राय भारतीय अजगर , भारतीय तारा कछुआ , भारतीय कोबरा और रसेल वाइपर शामिल हैं । इसके अलावा ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की 195 प्रजातियां दर्ज की गई हैं , जिनमें तीन लुप्तप्राय प्रजातियां मछली ईगल , केस्टेड सपेंट ईगल , और अस्थिर बाज़ ईगल शिकारी पक्षी शामिल हैं  इसके अतिरिक्त कुछ अन्य प्रजातियों की पक्षियों में भारतीय पित्त , कलगी शहद बजाई , स्वर्ग फ्लाईकैचर , पीतल पखों वाला जल – कपोत , कठफोड़वा , नीले फ्लाईकैचर और भारतीय मोर शामिल हैं इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में तितलियों की भी 74 प्रजातियां पाई जाती है। 

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान अनेक प्रजातियों के वन्यजीवों के साथ-साथ कई प्रकार के वनस्पतिय एवं औषधीय पौधों के लिए भी प्रसिद्ध है इस राष्ट्रीय उद्यान में उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं इस राष्ट्रीय उद्यान का लगभग 80 प्रतिशत संरक्षित क्षेत्र इस उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन क्षेत्र से घिरा है |

इस वन क्षेत्र में मुख्य रूप से सागौन के वृक्ष पाए जाते का इसके अलावा यहां बांस , ऐन ( मगरमच्छ की छाल ) , बीजा , धौड़ा , हल्दी , सलाई , सेमल और तेंदु के वृक्ष देखने को मिलते है । इस राष्ट्रीय उद्यान में हरे – भरे घास के मैदान और कई औषधीय पर्वतारोही पौधे भी पाएं जाते है जिसमें बीजा , घौड़ा , हल्दी , सलाई , सेमल और तेंदू शामिल हैं । बेहेडा , हिरदा , करया , गोंद , महुआ , मधुका ( क्रेप मर्टल ) , पलास  शामिल है यहां पाए जाने वाले औषधीय पौधों में पर्वतारोही कच्छ कुजली ( मखमली बीन ) , बेरिया , बीजा और बेहेड़ा शामिल हैं जिसमें मखमली बीन का प्रयोग पार्किंसंस रोग के इलाज के लिए भेरिया की पत्तियों का उपयोग कीट विकर्षक के रूप में किया जाता है।

2. चंदोली राष्ट्रीय उद्यान ( Chandoli National Park )

All information about Chandoli National Park

चंदोली राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना

चांदोली राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र राज्य का एक प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है यह राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र राज्य के तीन जिलों – सतारा , कोल्हापुर और सांगली में फैला हुआ है भारत सरकार द्वारा सन् 1985 में इसे एक वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया इसके बाद 2004 में इसे एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया |

यह राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र के चंदोली बांध के निकट स्थित है जिसके कारण इसका नाम चंदोली राष्ट्रीय उद्यान रखा गया है चंदोली बांध के निकट स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान का कुल 317.67 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है यह उद्यान समुद्र स्तर से 1900 से 3300 फीट की ऊंचाई पर महाराष्ट्र के राधानगिरी और कोयना वन्यजीव अभयारण्यों के बीच स्थित है। यूनेस्को द्वारा इस राष्ट्रीय उद्यान को विश्व विरासत स्थल के रूप में मान्यता दी गई है।

चंदोली राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास

चंदोली राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास काफी रोचक है 17 वीं शताब्दी में इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में मराठा साम्राज्य के किले प्राचीतगढ़ और भैरवगढ़ सहित कई ऐतिहासिक स्थल शामिल है ।

छत्रपति शिवाजी महाराज के शासन के दौरान इस संरक्षित क्षेत्र के अधिकांश हिस्से को युद्धबंदियों के लिए एक खुली जेल के रूप में उपयोग किया जाता था चंदोली राष्ट्रीय उद्यान को भारत सरकार द्वारा सन् 1985 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था जिसके बाद मई 2004 में इसे एक राष्ट्रीय उद्यान के रूप में मान्यता दी गई।

चंदोली राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव और पक्षी

चंदोली राष्ट्रीय उद्यान क‌ई प्रकार के वन्यजीवों और पक्षियों का घर है इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्तनधारियों की 23 प्रजातियां पाई जाती है  इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवों में भारतीय तेंदुए , बंगाल टाइगर , भारतीय बाइसन , तेंदुआ , बिल्ली , भारतीय विशाल गिलहरी , माउस हिरण सांभर हिरण भोकने वाले हिरण , ब्लैकबक और सुस्त भालू जैसे जानवर शामिल है इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की 122 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से कुछ प्रवासी पक्षी भी शामिल है इसके साथ ही यहां उभयचरों और सरीसृपों की भी लगभग 20 प्रजातियां पाई जाती है।

चंदोली राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति

चंदोली राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवो के साथ – साथ कई प्रकार की वनस्पतियां और औषधीय पौधे भी पाए जाते है इस राष्ट्रीय उद्यान के नम जंगलों और उत्तर पश्चिमी घाट के नम पर्णपाती जंगलों का मिश्रण देखने को मिलता है |

इस उद्यान के जंगलों में मुख्य रूप से भारतीय आंवला ,  डेविल अंजीर , जामुन , बरगद के वृक्ष , कोकोनट ट्री देखने को मिलते हैं । इस अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में आमतौर पाए जाने वाले पर धब्बेदार घासों में कालीकुसली डोंगाटी , बंगाल काली भाला घास , ब्लूस्टेम घास ,  कंगारू घास , भैस घास , ग्रेडर घास शामिल हैं इसके अतिरिक्त यहां पाए जाने वाले औषधीय पौधों और झाडियों में तमालपति , रणमिटी , कारवंड , तोरण , कडी़पत्ता और नरक्य आदि शामिल हैं।

 

3. संजय राष्ट्रीय उद्यान , मुंबई ( Sanjay National Park , Mumbai )

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र राज्य के सबसे बड़े नगर मुंबई के बोरीवली में स्थित है संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन् 1996 में की गई थी यह महाराष्ट्र राज्य के सबसे प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 103.84 वर्ग किलोमीटर है। संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान को बोरीवली राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास

चौथी शताब्दी ईस्वी पूर्व से संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र का एक लंबा इतिहास है प्राचीन भारत में सोपारा और कल्याण इस क्षेत्र के दो प्रमुख बंदरगाह थे इन बंदरगाहों से ग्रीस और मेसोपोटामिया जैसे प्राचीन सभ्यताओं के लोग व्यापार किया करते थे।

इस राष्ट्रीय उद्यान के केन्द्र में कन्हेरी गुफाएं हैं जिसका निर्माण बौद्ध भिक्षुओं द्वारा किया गया था 

1942 में बॉम्बे राष्ट्रीय उद्यान एक्ट के तहत तुलसी और विहार झीलो के जलग्रहण क्षेत्रों का अधिग्रहण किया गया और कृष्णगिरी राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना की गई उस समय इस राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 20 वर्ग किलोमीटर था |

सन् 1954 में डेयरी विकास बोर्ड ने इस राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के क्षेत्र में काम करना शुरू किया और सन् 1969 में राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के क्षेत्र के 2076 हेक्टेयर भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया उस समय इस क्षेत्र को संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में घोषित नहीं किया गया था लेकिन सन 1976 में इस राष्ट्रीय उद्यान के 68 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर बोरीवली राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया इसके बाद 1981 में इस राष्ट्रीय उद्यान को 82.25 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में विस्तारित कर दिया गया।

सन् 1996 में इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया और इसी वर्ष ठाणे डिवीजन के कुछ जंगलो को इस राष्ट्रीय उद्यान में शामिल कर दिया गया इसके बाद इस राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 103.84 वर्ग किलोमीटर हो गया।

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान अनेक प्रकार के दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों के जानवरों एवं क‌ई प्रकार के लुप्तप्राय वनस्पति के लिए के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। इस राष्ट्रीय उद्यान में चित्तीदार हिरण , ब्लैक नेप्ड हेयर , बार्किंग डीयर , साही , पाम सिवेट , माउस डीयर , रिसस मेकाक , बोनेट मेकाक , लंगूर , भारतीय लोमड़ी और सांभर आदि वन्यजीव देखने को मिलते है । 

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्र में लगभग 1,000 से अधिक पौधों की प्रजातियां, 250 प्रवासी वन्यजीवों की प्रजातियां, 5000 पक्षियों की प्रजातियां, 40 स्तनधारियों की प्रजातियां, 9 उभयचरों की प्रजातियां, 150 तितलियों की प्रजातियां और मछलियों की क‌ई हजार प्रजातियां पाई जाती है।

इस राष्ट्रीय उद्यान में 38 प्रकार के सरीसृपों की प्रजातियाँ पा‌ई जाती है जिसमें से इस राष्ट्रीय उद्यान में कोबरा , रसेल वाइपर , बैम्बू पिट वाइपर और सिलोनी कैट साँप जैसे क‌ई जहरीले सांंप पाए जाते है इसके साथ ही इस राष्ट्रीय उद्यान में क‌ई प्रकार के पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है इसके अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान के तुलसी झील में घड़ियाल ( मगरमच्छ ) और पाइथन भी देखने को मिलते हैं । 

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति

यह राष्ट्रीय उद्यान जानवरों के साथ-साथ कुछ विशेष प्रकार की वनस्पतियों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र है इस राष्ट्रीय उद्यान में अनेक प्रकार के लुप्तप्राय वनस्पतियों की प्रजातियां पाई जाती है इस राष्ट्रीय उद्यान में करीब 1000 से अधिक वनस्पतियों एवं पौधों की प्रजातियां पाई जाती है इस राष्ट्रीय उद्यान में कदंब, सागौन , बबूल और यूफोरबिएसि संघ के कुछ विशेष प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं इसके अलावा इस राष्ट्रीय उद्यान में कुछ विशेष प्रकार के फूल पाए जाते हैं जिसमें से कदंब, सागौन, यूफोरबिया लाल रेशमी कपास के फूल और कर्वी फूल शामिल है। 

कर्वी एक विशेष प्रकार का फूल है जो आठ वर्षो में केवल एक बार खिलता है यह फूल इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुतायत मात्रा में पाया जाता है।

4. गुगामल राष्ट्रीय उद्यान ( Gugamal National Park )

गुगामल राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना

महाराष्ट्र राज्य के अमरावती जिले में स्थित गुगामल राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र राज्य का एक खूबसूरत और प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है गुगामल राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 22 मार्च 1974 को किया गया था तथा भारत सरकार द्वारा सन् 1975 में इसे एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था ।

यह राष्ट्रीय उद्यान लगभग 36128 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है । यह राष्ट्रीय उद्यान मेलघाट टाइगर रिजर्व का एक हिस्सा है और इसे 1973-74 बाघ परियोजना के तहत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था

यह महाराष्ट्र का एकमात्र उद्यान है जहां बाघ पाए जाते हैं । महाराष्ट्र के सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला में स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान को गाविलगढ़ हिल्स के नाम से भी जाना जाता है यहां पाए जाने वाले वन्यजीवो के कारण यह राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के लिए एक मुख्य आकर्षण का केंद्र है इस राष्ट्रीय उद्यान में वर्षभर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।

गुगामल राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वन्यजीव

यह राष्ट्रीय उद्यान विविध वनस्पतियों और वन्यजीवों का घर है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवों में बंगाल टाइगर , भारतीय तेंदुए , आलसी भालू , भारतीय सियार , धारीदार लकड़बग्घा , चौसिंगा , सांभर गौर , भोंकने वाला हिरण , उड़न गिलहरी , चीतल, नीलगाय , जंगली सूअर , लंगूर और रीसस बंदर शामिल है इसके अलावा इस उद्यान में बहने वाली नदियों में 25 प्रजातियों की मछलियां पाई जाती है वर्ष 1990 में कृत्रिम रूप से मगरमच्छों को यहां लाया गया था।

गुगामल राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति

यह राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवों के साथ-साथ वनस्पति के क्षेत्र में भी काफी समृद्ध है इस उद्यान में दक्षिणी शुष्क पर्णपाती जंगल पाए जाते है इस उद्यान में पेड़ – पौधों और जड़ी – बूटियों की लगभग 750 विभिन्न प्रजातिया पाई जाती है । इसमें मुख्य रूप से ऐन, तिवास, आओला, लेंडिया, धवाड़ा, कुसुम शामिल हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान का वन क्षेत्र में व्यापक रूप सबसे अधिक मात्रा में बांस के पेड़ पाए जाते है इस राष्ट्रीय उद्यान का संपूर्ण क्षेत्र क‌ई प्रकार के औषधीय पौधों से समृद्ध है।

5. नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान ( Navegaon National Park )

नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना :- 

नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान भारत के महाराष्ट्र राज्य के  गोंदिया जिले में स्थित एक प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान सन् 1975 में स्थापित किया गया था। महाराष्ट्र के पूर्वी भाग में स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान 133.78 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है |

इस राष्ट्रीय उद्यान में एक पक्षी अभयारण्य, एक हिरण उद्यान , और तीन सुंदर उद्यान भी मजूद है इस राष्ट्रीय उद्यान में मौजूद पक्षी अभयारण्य को सलीम अली पक्षी अभयारण्य के रूप में जाना जाता है महाराष्ट्र में पाई जाने वाली पक्षियों का लगभग 65% हिस्सा इसी पक्षी अभयारण्य में पाया जाता है । 

प्रकृति संरक्षण की दृष्टि से इस राष्ट्रीय उद्यान का काफी महत्व है यह वास्तव में प्रकृति की अमूल्य धरोहर है इसके सुरम्य परिदृश्य , इसकी शुद्ध और ताजी हवा का आनंद लेने के वर्षभर में लगभग 50,000 पर्यटक इस राष्ट्रीय उद्यान में घूमने के लिए आते है।

नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव और वनस्पति  

नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान अनेक प्रजातियों के वन्यजीवों , वनस्पतियों एवं पक्षियों का घर है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवो में मुख्य रूप से तेंदुए , सुस्त भालू , गौर , सांभर , चीतल और लंगूर शामिल हैं इसके अलावा प्रत्येक वर्ष सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों के झुंड इस राष्ट्रीय उद्यान का दौरा करने आते है जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से भी इस उद्यान में अपार संभावनाएं हैं राष्ट्रीय उद्यान में शुष्क मिश्रित वन से लेकर विविध प्रकार की वनस्पतियाँ हैं इस उद्यान में मुख्यत: दक्षिणी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं।

6. पेंच राष्ट्रीय उद्यान ( Pench National Park )

पेंच राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना

पेंच राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र के प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान में से है यह राष्ट्रीय उद्यान महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमाओं के बीच स्थित है पेंच राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1983 में की गई थी। यह राष्ट्रीय उद्यान 292.83 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है 

इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम इसे दो भागों में बांटने वाली पेंच नदी के नाम पर रखा गया है जो इस राष्ट्रीय उद्यान के उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर बहती है यह एक सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय उद्यान के साथ ही एक महत्त्वपूर्ण बाघ अभयारण्य भी है इस राष्ट्रीय उद्यान को भारत का सर्वश्रेष्ठ बाघ अभयारण्य होने का गौरव प्राप्त है।

महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान में अनेकों दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीव निवास करते है, हिमालय क्षेत्र के लगभग 210 प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां इस राष्ट्रीय उद्यान में प्रवास के लिए आती है। इस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में पाई जाने वाली खूबसूरत झीलें , ऊंचे पेड़ों के सघन झुरमुट , रंगबिरंगे पक्षियों का कलरव , शीतल हवा के झोंके और वन्य प्राणियों का अनूठा संसार यहां आने वाले पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास

पेंच राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास बहुत पुराना हैं इस राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र की समृद्धि का उल्लेख 16 वीं सदी में मुगल सम्राट अकबर के शासन काल के समय लिखित आइन – ए अकबरी में भी किया गया है इस राष्ट्रीय उद्यान को मूल रूप से भारत सरकार द्वारा वर्ष 1977 में एक वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था इसके बाद वर्ष 1983 में इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया इसके बाद बाघ परियोजना के तहत वर्ष 1993 में इस राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित किया गया

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीव

पेंच राष्ट्रीय उद्यान अनेक प्रकार के वन्यजीवों की प्रजातियां निवास स्थान है इस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वन्यजीवों में रॉयल बंगाल टाइगर , तेंदुए , सुस्त भालू , चिकारा , चीतल , सांभर और नीलगाय , जंगली भैंस और लगभग 65 बाघ शामिल है।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति

पेंच राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीवों के साथ-साथ वनस्पतियों के हिसाब से भी काफी समृद्ध और धनी है । इस राष्ट्रीय उद्यान में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और सिवनी जिल के घने जंगल क्षेत्र शामिल है यह राष्ट्रीय उद्यान क‌ई प्रकार के औषधीय पौधों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है । इस उद्यान में औषधीय महत्त्व के दुर्लभ पौधों की 1300 से अधिक प्रजातियां इसके अलावा इस उद्यान में सागौन , बास , सफेद कुल्लू और महुआ के पेड़ बहुतायत मात्रा में पाए जाते है ।

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षी

पेंच राष्ट्रीय उद्यान में दुर्लभ जानवरों के साथ ही कई प्रकार के लुप्तप्राय पक्षियों की प्रजातियां निवास करती है शीत ऋतु के समय प्रति वर्ष बर्फीले क्षेत्रों के लगभग 200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां भोजन और प्रजनन के लिए यहां आकर बस जाते है

इस राष्ट्रीय उद्यान में निवास करने वाले पक्षियों में मुख्य रूप से रेड जंगल फोल , कोपीजेन्ट , क्रीमसन , बेस्ट डबारबेट , रेड वेन्टेड बुलबुल , रॉकेट टेल डोंगों , मेंगपाई राबिन , लेसर , किस्टल टील , विनेटल सोवेला , तोता , हॉर्नबिल और ब्राह्मणी बत्तख शामिल हैं इसके साथ ही देशभर में तेजी से विलुप्त होती जा रही गिद्ध भी इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुतायत मात्रा में पाये जाते हैं जिनमें से इस राष्ट्रीय उद्यान में दो प्रमुख प्रकार के लाल गिद्ध और सफेद गिद्ध पाये जाते हैं।

7. राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य ( Radhanagri Wildlife Sanctuary )

राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना

राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य या दाजीपुर वन्यजीव अभयारण्य महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित है यह महाराष्ट्र राज्य का सबसे पहला वन्यजीव अभ्यारण है दाजीपुर वन्यजीव अभ्यारण की स्थापना 1958 में की गई थी दाजीपुर वन्यजीव अभयारण्य को बाइसन अभयारण्य के रूप में भी जाना जाता है पहले इस अभयारण्य का क्षेत्र कोल्हापुर के महाराजा का शिकारस्थल था । यह अभयारण्य भारतीय बाइसन या गौर के लिए महाराष्ट्र राज्य के सबसे प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय वन्यजीव अभ्यारण में से एक है।

राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाले वन्यजीव और पक्षी  

राधानगरी वन्यजीव अभयारण्य अनेक प्रजातियों के वन्यजीवो, पक्षियों एवं वनस्पतियो के लिए प्रसिद्ध है इस वन्यजीव अभयारण्य में स्तनधारियों की 47 प्रजातियाँ, सरीसृपों की 59 प्रजातियाँ, पक्षियों की 264 प्रजातियाँ और तितलियों की 66 प्रजातियाँ पाई जाती है।  

इस अभयारण्य में पाए जाने वाले स्तनधारियों में भारतीय तेंदुआ, सुस्त भालू , जंगली सूअर , भौंकने वाले हिरण , माउस हिरण , सांभर , विशाल भारतीय गिलहरी और जंगली कुत्ते शामिल है यह अभयारण्य मुख्य रूप से भारतीय बाइसन या गौर के लिए प्रसिद्ध है ।

वर्ष 2004 की रिपोर्ट के अनुसार इस अभयारण्य में गौर की संख्या 610 है इसके अलावा इस अभयारण्य में पा‌ई जाने वाली पक्षियों की प्रजातियों में मुख्य रूप से गिद्ध , ईगल , जंगली मुर्गी , बटेर , प्लोवर , कबूतर , उल्लू , नाइट्जर्स , किंगफिशर , मधुमक्खी भक्षक , हॉर्नबिल , कठफोड़वा , बुलबुल , फ्लाईकेचर और सनबर्ड शामिल है।

हैबर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा इस वन्यजीव अभयारण्य को एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र के रूप में नामित किया गया है यह अभयारण्य दुर्लभ और विश्व स्तर पर खतरे में पड़ी नीलगिरी लकड़ी-कबूतर का घर है यहां पाई जाने वाली अन्य प्रजातियों में सीलोन फ्रॉगमाउथ , पीले-भूरे बुलबुल , डस्की ईगल-उल्लू , ग्रेट पाइड हॉर्नबिल और मालाबार व्हिसलिंगथ्रश शामिल हैं।

8. फांसद वन्यजीव अभयारण्य , मुंबई ( Phansad Wildlife Sanctuary , Mumbai )

फांसद वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से लगभग 140 किमी दूरी पर स्थित महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित फांसद पक्षी अभयारण्य महाराष्ट्र राज्य का महाराष्ट्र राज्य का एक प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य एवं पक्षी अभयारण्य है इस अभयारण्य में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों पाई जाती है पक्षियों के साथ ही इस अभयारण्य में स्तनधारी वन्यजीवो की भी अनेक प्रजातियां पाई जाती है ।

फांसद वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 1982 में की गई थी यह अभयारण्य 84.36 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

फांसद वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाले वन्यजीव और वनस्पति

फांसद वन्यजीव अभयारण्य विभिन्न प्रजातियों के वनस्पतियों और वन्यजीवों के लिए समृद्ध है । इस अभयारण्य में पाए जाने वाले वन्यजीवों में स्तनधारियों की 16 प्रजातियाँ , पक्षियों की 62 प्रजातियाँ , सरीसृपों की 17 प्रजातियां और कीड़े की 47 प्रजातियां पाई जाती है इस अभयारण्य के स्तनधारियों में मुख्य रूप से भारतीय विशाल गिलहरी , भौंकने वाला हिरण , लकड़बग्घा , गौर और तेंदुआ शामिल है।

इस अभयारण्य में अर्ध – सदाबहार , मिश्रित और शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं इस अभयारण्य में मुख्यत: सागौन और आम के पेड़ पाए जाते हैं इस अभयारण्य में पौधों की लगभग 710 प्रजातियाँ पाई जाती है हैं जिनमे पेड़ों की 179 प्रजातियां , झाड़ियों की 66 प्रजातियां एवं जड़ी – बूटियों की 141 प्रजातियां पाई जाती है।

9. नागजीरा वन्यजीव अभयारण्य ( Nagzira Wildlife Sanctuary )

नागजीरा वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना

नागजीरा वन्यजीव अभयारण्य महाराष्ट्र के भंडारा और गोंदिया जिले के बीच स्थित जैव विविधता से समृद्ध महाराष्ट्र राज्य का एक प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य है यह अभयारण्य राष्ट्रीय राजमार्ग – 53 के निकट स्थित है। नागजीरा वन्यजीव अभयारण्य को 3 जून 1970 को एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था वर्तमान समय में यह अभयारण्य 153 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

नागजीरा वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाले वन्यजीव और वनस्पति 

यह वन्यजीव अभयारण्य अपनी सुरम्य परिदृश्य के साथ, शानदार वनस्पति और जीवों की समृद्ध विविधता के लिए जाना जाता है यह अभयारण्य क‌ई प्रजातियों के वन्यजीवों का निवास स्थान है इस वन्यजीव अभयारण्य में स्तनधारियों की 34 प्रजातियां , पक्षियों की 166 प्रजातियां , सरीसृपों की 36 प्रजातियां और चार उभयचरों की प्रजातियां पाई जाती है ।

इस अभयारण्य में बड़े जंगली स्तनधारियों में मुख्य रूप से बाघ , तेंदुए , भारतीय गौर , सांभर , नीलगाय , चीतल , जंगली सूअर , सुस्ती भालू , भौंकने वाले हिरण , माउस हिरण और जंगली कुत्ता शामिल है। इसके अतिरिक्त इस वन्यजीव अभयारण्य में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं । 

10. भामरागढ़ वन्यजीव अभयारण्य ( Bhamragarh Wildlife Sanctuary ) 

भामरागढ़ वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना

भामरागढ़ वन्यजीव अभयारण्य महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित महाराष्ट्र राज्य का एक खुबसूरत वन्यजीव अभयारण्य है भामरागढ़ वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 1997 में की गई थी यह अभयारण्य लगभग 104.38 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य हरियाली से सम्पन्न है अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण वर्षभर यहां पर्यटकों और वन्य प्रेमियों कोई भीड़ लगी रहती है। 

भामरागढ़ वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाने वाले वन्यजीव और वनस्पति

भामरागढ़ वन्यजीव अभयारण्य कई प्रजातियों के वन्यजीवों और वनस्पतियों के कारण वन्यप्रेमियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है इस अभयारण्य में पाए जाने वाले वन्यजीवों में तेंदुआ, नीलगाय, मोर, उड़न गिलहरी, जंगली भालू , जगली सूअर शामिल है।

इसके अलावा इस अभयारण्य में वनस्पतियों की अनेक प्रजातियां पाई जाती है इस अभयारण्य में मुख्यत: आम , जामुन , कुसुम और बांस के वृक्ष पाए जाते है इसके अतिरिक्त यहां नील, तरोता, कुड आदि स्थानिक झाड़ियों की प्रजातियां भी पाई जाती है। 

पमलगुट्टम और परलकोटा नामक दो प्रमुख नदियां इस वन्यजीव अभयारण्य से होकर बहती हैं जो इस अभयारण्य की वनस्पतियों और जीवों के लिए मुख्य पानी का स्रोत है।

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