मीनाक्षी मंदिर की स्थापना और इतिहास । Meenakshi Temple madurai history in Hindi 2022

मीनाक्षी मंदिर की स्थापना और इतिहास । Meenakshi Temple madurai history in Hindi 2022

मीनाक्षी मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य के मदुरई शहर में स्थित है एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक हिंदू मंदिर है यह मंदिर भगवान शिव एवं माता पार्वती की अवतार मीनाक्षी देवी को समर्पित है इस मंदिर को मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर और मीनाक्षी अम्मन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है इस मंदिर को 2500 वर्ष पुराने मदुरई शहर की जीवन रेखा भी कहा जाता है। हमने इस लेख में मीनाक्षी मंदिर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे मीनाक्षी मंदिर की स्थापना किसने की, मीनाक्षी मंदिर का इतिहास, मीनाक्षी मंदिर की संरचना एवं वास्तुकला, मीनाक्षी मंदिर की विशेषता एवं मीनाक्षी मंदिर कैसे पहुंचे से जुड़ी जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी को साझा किया है अगर आप मीनाक्षी मंदिर मदुरई से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को जानना चाहते हैं इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।


Meenakshi temple madurai history in Hindi

मीनाक्षी मंदिर का इतिहास ( Meenakshi Temple History in Hindi )

कहा जाता है की इस मंदिर की स्थापना भगवान इंद्र ने की थी इस मंदिर का निर्माण भगवान इंद्र ने तब किया था जब वह अपने कुकर्मो की वजह से तीर्थयात्रा पर जा रहे थे जैसे ही भगवान इंद्र मदुरई के स्वयंभू लिंग के समीप पहुंचे वैसे ही उन्हें लगा की उनका बोझ हल्का होने लगा उन्हें लगने लगा कि उनका बोझ कोई उठा रहा है।

इस चमत्कार को देखते हुए भगवान इंद्र ने स्वयं इस मंदिर में लिंग को प्रतिष्टापित किया यह भी माना जाता है कि इसी स्थान पर भगवान इंद्र भगवान शिव की मूर्ति शिवलिंग के रूप में मिली जिसके कारण उन्होंने यहां मंदिर की स्थापना की यही कारण है कि इस मंदिर में मनाए जाने वाले त्योहारों की शोभायात्रा में भगवान इंद्र के वाहन को भी स्थान दिया जाता है।

किन्तु तमिल साहित्य के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कुछ शताब्दी पहले करवाया गया था। प्रसिद्ध हिन्दू शैव मतावलम्बी संत तिरुज्ञानसंबन्दर ने इस मन्दिर को आरम्भिक सातवीं सदी का बताया है कहा जाता है कि मुस्लिम शासक मलिक कफूर ने 1310 में इस मीनाक्षी मंदिर में खूब लूटपाट की थी इस मंदिर के प्राचीन घटकों को नष्ट कर दिया था इसके प्रश्चात पुनर्निर्माण आर्य नाथ मुदलियार ने 1559 ई. से 1600 ई. के बीच इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था फिर तिरुमलय नायक ने 1623 से 1659 के बीच पुनः इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया तिरुमल‌ई नायक ने ही इस मंदिर के निर्माण में अपना सर्वाधिक मूल्यवान योगदान दिया 

इस मन्दिर के वसंत मण्डप के निर्माण का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है। मंदिर के गलियारे में रानी मंगम्मल द्वारा मीनार्ची नायकर मंडपम का निर्माण किया गया था।

विश्वनाथ नायक ने आधुनिक शिल्प शास्त्र के अनुसार इस मंदिर को पुनः बनवाया था जिनमे 14 प्रवेश द्वार है जो 45-50 मीटर की ऊँचाई के थे इन प्रवेश द्वारा में सबसे लंबा दक्षिणी टावर था इस टावर की ऊंचाई 51.9 मीटर थी इसके साथ ही इस मंदिर में दो तराशे गए प्राचीन विमानो का निर्माण भी किया गया और यहां क‌ई देवी-देवताओ की मूर्तियाँ की पुनर्स्थापना की गई।


मीनाक्षी मंदिर मदुरई की संरचना एवं वास्तुकला ( Architecture of Meenakshi temple madurai ) :- 

यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है जो आयताकार क्षेत्र में बना हुआ है यह दक्षिण भारत का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। कहा जाता है कि इस मन्दिर का गर्भगृह 3500 वर्ष पुराना है जिसकी बाहरी दीवारों का निर्माण लगभग 1500-2000 वर्ष पहले किया गया था।

इस मंदिर में कुल 27 गोपुरम जिनमें से यह मंदिर 12 विशाल गोपुरमों से घिरा हुआ है हैं जिन पर देवी – देवताओं और विभिन्न जीव-जंतुओं की बेशुमार रंग-बिरंगी आकृतियां उत्कृष्ट की गई है जो प्राचीन द्रविड़ वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण है।

मीनाक्षी मंदिर का संपूर्ण क्षेत्र लगभग 45 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है मीनाक्षी मंदिर की लम्बाई 254 मी एवं चौडा़ई 237 मी है यह मन्दिर बारह विशाल गोपुरमों से घिरा हुआ है जो चारदीवारी से बना है इसमें दक्षिण द्वार का गोपुरम सबसे ऊंचा है। 

इस मंदिर के प्रवेश द्वार के निकट तीन परिक्रमा स्थल हैं तीसरे परिक्रमा स्थल के पथ में मूर्ति के दर्शनों के लिए गर्भ गृह तक जाने का मार्ग है।

इस मंदिर के भीतर एक शिव मन्दिर भी है मीनाक्षी मंदिर का गर्भ गृह शिव मंदिर के बांये स्थित है। 

यह शिव मंदिर समूह के मध्य में स्थित है इस मन्दिर में भगवान शिव की नटराज मुद्रा स्थापित है शिव की भगवान शिव इस मुद्रा में सामान्यतः नृत्य करते हुए अपना बांया पैर उठाए हुए होती है परन्तु इस मंदिर में भगवान शिव के नटराज मुद्रा की विशेषता यह है कि इस मामले में स्थित नटराज मुद्रा में भगवान शिव अपना दायां पैर उठाए हुए हैं भगवान शिव के इस विपरीत नटराज मुद्रा के लिए एक कथा प्रचलित है इस कथा के अनुसार राजा राजशेखर पांड्य की प्रार्थना पर भगवान ने यहां अपनी मुद्रा बदल ली थी। उनका मानना था कि सदा एक ही पैर को उठाए रखने से उन पर अत्यधिक भार पडे़गा। यह निवेदन राजशेखर पांडेय के व्यक्तिगत नृत्य अनुभव पर आधारित था इस मंदिर में स्थित भगवान शिव के नटराज की मूर्ति, एक बडी़ चांदी की वेदी में बंद है चांदनी में बंद इस मूर्ति को ‘वेल्ली अम्बलम्’ कहा जाता हैं।

मीनाक्षी मंदिर गृह के बाहर बडे़ शिल्प आकृतियां हैं जो एक ही पत्थर से निर्मित है इसके साथ ही इस मंदिर परिसर मे वृहत गणेश मन्दिर भी है इस मंदिर को मुकुरुनय विनायगर् कहते हैं कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थित मूर्ति यहां सरोवर की खुदाई के दौरान मिली थी। 

मीनाक्षी मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार :- 

मीनाक्षी मन्दिर से में मनाया जाने वाला सबसे प्रमुख त्यौहार मीनाक्षी तिरुकल्याणम है इस त्योहार का  आयोजन प्रतिवर्ष चैत्र मास में किया जाता है यह त्यौहार लगभग 1 महीने तक चलता है जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का आयोजन किया जाता दिव्य जोड़ो के इस विवाह प्रथा को दक्षिण भारत में “मदुराई विवाह” का नाम दिया गया है।

इस एक महीने की कालावधि में इस मंदिर में बहुत सारे त्योहार मनाए जाते हैं जिसमें “थेर थिरुविजहः” और “ठेप्पा थिरुविजहः” शामिल है इस त्यौहार के अलावा नवरात्रि एवं शिवरात्रि उत्सव भी यहाँ धूमधाम से मनाया जाता हैं।

मीनाक्षी मंदिर की विशेषता :-

मीनाक्षी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मंदिर में 12 प्रवेश द्वार है और प्रत्येक प्रवेश द्वार लगभग 40 मीटर ऊँचा है इसके साथ ही इस मंदिर में स्थित 985 स्तंभ और 24 टावर इस मंदिर की विशेषता को कई गुना बढ़ा देते हैं

ये सभी स्तंभ यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आकर्षण का केंद्र है इन सभी स्तंभों को स्तंभ मण्डप कहा जाता है प्रत्येक स्तंभ में हाथ थपथपाने पर एक भिन्न स्वर निकालता है यह स्वर अत्यंत मधुर है इस स्तंभ मण्डप के दक्षिण में कल्याण मण्डप स्थित है, जहां प्रतिवर्ष चैत्र मास ( मध्यम अप्रैल ) में चितिरइ उत्सव मनाया जाता है।

इस उत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस उत्सव में भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह का आयोजन करवाया जाता है इस मंदिर में स्थित स्वर्णकमल पुष्कर जो कि एक एक पवित्र सरोवर है इस मंदिर की विशेषता को कई गुना बढ़ा देते हैं यह पवित्र सरोवर 165 फीट लम्बा एवं 120 फीट चौड़ा है। 

इस मंदिर में मीनाक्षी देवी एवं अन्य देवी–देवताओं की अत्यंत सुंदर प्रतिमाएं हैं इस मंदिर के आठ खंभों पर माता लक्ष्मी की सुंदर मूर्तियां बनाई गयी हैं जो इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करते हैं।

इस मंदिर की विशेषता का एक और कारण इस मंदिर में स्थित मूर्तियां हैं कहा जाता है की मीनाक्षी मंदिर में कुल 33,000 मूर्तियाँ है जो इस मंदिर के आकर्षण और विशेषता में चार चांद लगा देते हैं।


मीनाक्षी मंदिर कैसे पहुंचे ( How to Reach Meenakshi Temple ) –

हवाई जहाज द्वारा मीनाक्षी मंदिर कैसे पहुंचे :-

मीनाक्षी मंदिर का सबसे निकटतम हवाई अड्डा मदुरई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो मीनाक्षी मंदिर से लगभग 11.7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह हवाई अड्डा भारत के सभी बड़े शहरों के हवाई अड्डे एवं विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है इसके बात मीनाक्षी मंदिर का सबसे निकटतम हवाई अड्डा चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो मीनाक्षी मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इस हवाई अड्डे से मदुर‌ई शहर पहुंचने के लिए 24 घंटे टैक्सी सेवा उपलब्ध है मदुरई शहर पहुंचने के बाद मीनाक्षी मंदिर पहुंचने के लिए आपको अनेक प्रकार की सेवाएं मिल जाएगी। 


रेलमार्ग द्वारा मीनाक्षी मंदिर कैसे पहुंचे :– 

मीनाक्षी मंदिर का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन मदुरई जंक्शन है जो मीनाक्षी मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुदराई रेलवे स्टेशन भारत के कई शहरों के रेल मार्ग के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। वर्तमान समय बेंगलुरु से मदुरई के लिए प्रतिदिन 9 ट्रेनें चलती है। 

सड़क मार्ग द्वारा मीनाक्षी मंदिर कैसे पहुंचे :-

मदुराई शहर दक्षिण भारत के सभी बड़े एवं छोटे शहरों के साथ जुड़ा हुआ है मदुरई शहर से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर है बस स्टैंड उपलब्ध है इस बस स्टैंड में 24 घंटे बस सेवा उपलब्ध है।


मीनाक्षी मंदिर से संबंधित कुछ पूछे जाने वाले प्रश्न ( FAQ Related to Meenakshi Temple Madurai in Hindi )

1. मीनाक्षी मंदिर कहां स्थित है ?

उत्तर :- मीनाक्षी मंदिर तमिलनाडु के मदुरै शहर में स्थित है।

2. मीनाक्षी मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ?

उत्तर :- मीनाक्षी मंदिर का निर्माण किसने करवाया था इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है लेकिन ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार इस मंदिर का प्रारंभिक निर्माण स्वयं भगवान इंद्र ने किया था।

3. मीनाक्षी मंदिर का निर्माण किस शैली में किया गया है ?

उत्तर :- मीनाक्षी मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली के अंतर्गत नायक शैली में किया गया है।

4. मीनाक्षी मंदिर किस देवता को समर्पित है ?

उत्तर :- तमिलनाडु के मदुरै में स्थित मीनाक्षी मंदिर माता पार्वती को समर्पित है इस मंदिर में मुख्य रूप से भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है।

5. मीनाक्षी मंदिर के दर्शन का समय करता है ?

उत्तर :- मीनाक्षी मंदिर में दर्शन का समय 

सुबह :- 5 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक 

शाम :-  4 बजे से रात 9.30 बजे तक


इन्हें भी पढ़ें :- 

केदारनाथ मंदिर की स्थापना, इतिहास एवं केदारनाथ मंदिर की वास्तुकला

कोणार्क सूर्य मंदिर की स्थापना एवं इसका इतिहास

जगन्नाथ मंदिर, पुरी की स्थापना, इतिहास एवं इस मंदिर से जुड़ी सभी जानकारी

भारत के 50 सबसे प्रसिद्ध मंदिरो की सूची 

सोमनाथ मंदिर की स्थापना इतिहास सोमनाथ मंदिर की संपूर्ण जानकारी

Leave a Comment